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मणिकर्णिका घाट विवाद: ‘रांझणा’ से ‘ब्रह्मास्त्र’ तक बनारस के घाटों और गलियों से इन फिल्मों का है अटूट रिश्ता

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Varanasi Bollywood Movies: धर्म और आध्यात्म की नगरी वाराणसी का सुप्रसिद्ध इन दिनों विकास परियोजनाओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर राजनीतिक विवादों के केंद्र में है। जहां एक ओर सरकार विकास की बात कर रही है, वहीं विपक्षी दल इसे प्राचीन पहचान के साथ छेड़छाड़ बता रहे हैं। हालांकि, विवादों से इतर, काशी का यह महाश्मशान और यहां के घाट दशकों से भारतीय सिनेमा के लिए एक ‘जीवंत कैनवास’ रहे हैं।

वाराणसी की संकरी गलियां, गंगा की अविरल धारा और मणिकर्णिका घाट पर जीवन-मृत्यु का शाश्वत सत्य फिल्मकारों को हमेशा अपनी ओर खींचता रहा है। चाहे वह प्रेम की बेताबी हो या जीवन का दार्शनिक अंत, बॉलीवुड ने काशी को अपनी कहानियों की आत्मा बनाया है।

‘रांझणा’ का अस्सी घाट और ‘मसान’ की मणिकर्णिका

साल 2013 में आई ‘रांझणा’ ने बनारस को एक नए रंग में पेश किया। धनुष और सोनम कपूर की इस प्रेम कहानी में अस्सी घाट और गोदौलिया की गलियां किसी मुख्य किरदार की तरह नजर आईं। वहीं, साल 2015 की फिल्म ‘मसान’ ने मणिकर्णिका घाट की उस वास्तविकता को दुनिया के सामने रखा, जिससे अक्सर लोग नजरें चुराते हैं। विक्की कौशल का किरदार डोम समुदाय और घाट के जलते श्मशान के बीच जीवन की जद्दोजहद को दिखाता है।

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आध्यात्म और जीवन दर्शन का संगम: ‘मुक्ति भवन’ और ‘बनारस’

काशी की महिमा केवल उसकी सुंदरता में नहीं, बल्कि इसके दार्शनिक पक्ष में भी है। फिल्म ‘मुक्ति भवन’ (2016) पूरी तरह से बनारस के उस ‘सैल्वेशन होटल’ पर आधारित है, जहां लोग मोक्ष की प्रतीक्षा में आते हैं। इसी तरह उर्मिला मातोंडकर की फिल्म ‘बनारस’ और सनी देओल की ‘मोहल्ला अस्सी’ ने घाटों की चाय की दुकानों और स्थानीय संस्कृति को पर्दे पर जीवंत किया।

‘ब्रह्मास्त्र’ से ‘वनवास’ तक: आधुनिक सिनेमा का आकर्षण

अयान मुखर्जी की के ‘केसरिया’ गाने ने घाटों की भव्यता को एक बार फिर ग्लोबल बना दिया। हाल ही में नाना पाटेकर की फिल्म ‘वनवास’ और रोमांटिक कॉमेडी ‘भूल चूक माफ’ की शूटिंग भी वाराणसी के राजेंद्र प्रसाद घाट और गलियों में हुई है। बनारस केवल एक लोकेशन नहीं, बल्कि एक भावना है जो हर फ्रेम में गहराई भर देती है। यही वजह है कि विवाद चाहे जो भी हों, सिनेमाई पर्दे पर काशी का जादू हमेशा बरकरार रहेगा।

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