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MP: फर्जी नामों पर करोड़ों के लोन, ED ने 5 लोगों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

MP: फर्जी नामों पर करोड़ों के लोन, ED ने 5 लोगों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भोपाल जोनल ऑफिस ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा से जुड़े एक लोन घोटाले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मार्क पियस करारी और चार अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है. यह चार्जशीट बुधवार को भोपाल की विशेष PMLA अदालत में पेश की गई, जिस पर अदालत ने आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं.

यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर सामने आया था. सीबीआई ने पहले ही इस मामले में मनोज परमार, तत्कालीन बैंक मैनेजर मार्क पियस करारी और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.

फर्जी नामों पर लिए गए करोड़ों के लोन

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि मनोज परमार ने पंजाब नेशनल बैंक, आष्टा (जिला सीहोर) के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की मिलीभगत से दो सरकारी योजनाओं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (CMYUY) के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया. साल 2016 में इन योजनाओं के तहत कुल 18 लोन मंजूर कराए गए, जिनकी कुल राशि करीब 6.20 करोड़ रुपये थी. इनमें से लगभग 6.01 करोड़ रुपये वास्तव में निकाल भी लिए गए.

जांच में सामने आया कि ये लोन फर्जी लोगों के नाम पर, जाली दस्तावेजों और नकली कोटेशन के आधार पर मंजूर किए गए. बैंक के नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया. जहां दूसरी स्तर की मंजूरी जरूरी थी, उसे जानबूझकर छोड़ा गया और ब्रांच मैनेजर की सीमा से ज्यादा रकम के लोन भी पास कर दिए गए.

जमीन पर कोई काम नहीं, सिर्फ कागजों में कारोबार

बाद में जब बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो सच्चाई सामने आ गई. जिन लोगों के नाम पर लोन दिखाए गए थे, उन्होंने खुद कहा कि उन्होंने न तो कोई आवेदन किया और न ही उन्हें कोई लोन मिला. जिन उद्योगों और व्यवसायों के नाम पर लोन लिया गया था, वे कहीं मौजूद ही नहीं थे. यानी रोजगार देने के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं का खुला दुरुपयोग किया गया.

पैसे को घुमाकर बनाई गई काली कमाई

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि लोन की रकम को मनोज परमार और उसके करीबियों की फर्मों के खातों में घुमाया गया. कई खातों के जरिए पैसे को इधर-उधर किया गया, कुछ रकम नकद निकाल ली गई और कुछ से आरोपियों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं. यह पूरा खेल पैसे के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए किया गया, जिसे कानून की भाषा में ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ कहा जाता है.

पहले ही जब्त हो चुकी हैं संपत्तियां

इस मामले में ईडी पहले ही मनोज परमार और अन्य आरोपियों की करीब 2.08 करोड़ रुपये की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है. ये संपत्तियां मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा इलाके में स्थित हैं.

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