
लखनऊ। जरा सोचिए निश्शुल्क मिलने वाली धूप को कैद कर सोलर एनर्जी बनाएं और फिर उससे अपने घरों की बिजली जलाने पर बिल इतना कम देना पड़े कि वह नहीं के बराबर हो जाए तो इसकी सुखद अनुभूति कैसी होगी ? यूपीनेडा के सचिव पंकज सिंह ने सोलर एनर्जी के फायदे बताते हुए उदाहरण सहित उपभोक्ताओं की सोलर पैनल से जुड़ी जिज्ञासा का समाधान किया। । एक होटल में दैनिक जागरण के सहयोग से आयोजित हैवेल्स सोलर चौपाल में सोलर एनर्जी के सुनहरे भविष्य का रोडमैप भी साझा किया ।
यूपीनेडा सचिव ने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना से 4300 वेंडर जुड़े हैं । एक वेंडर के पास दस लोगों की टीम रहती है। यानी 43 हजार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार सिर्फ एक स्कीम ने दिया है। पीएम सूर्य घर योजना आवासीय जरूरत के लिए है। वहीं, आवास विकास परिषद, विकास प्राधिकरण हाइराइज अपार्टमेंट बनाते हैं। वहां छत का हिस्सा प्रतिबंधित होता है।
वहां पर पीएम सूर्यघर योजना के तहत लिफ्ट, मार्ग प्रकाश, बागबानी व पार्क के लिए उपयोग होने वाले पंप के लिए 500 किलोवाट प्रतिदिन की क्षमता वाला प्लांट लगा सकते हैं। उसमें 18 हजार रुपये प्रति किलोवाट यानी अधिकतम 90 लाख रुपये की सब्सिडी मिल सकती है। आप किसान हैं और आपके पास ट्यूबवेल है तो पीएम कुसुम सी-1 में 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है।
जिनके पास नहीं है जगह…
ऐसे किसान जिनके पास सोलर प्लांट लगाने के लिए स्थान नहीं है, उनके लिए कुसुम सी-2 है। उत्तर प्रदेश में सी-1 और सी-2 को मिलाकर दो हजार मेगावाट का लक्ष्य था। इसको प्राप्त करने के लिए 1700 मेगावाट का टेंडर व पीपीए फाइनल कर दिया है। इस योजना के लिए 550 किसानों को चयनित किया है, जो औसतन तीन मेगावाट का प्लांट लगाएंगे।
इसमें भी सब्सिडी लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक है। एलडीए से गैरविवादित 232 आरडब्ल्यूए की सूची मांगी है , वहां शत प्रतिशत सोलर सिस्टम लगाए जाएंगे। यूपीनेडा ने सभी विकास प्राधिकरणों को प्रस्ताव भेजा है जिसमें नए मानचित्र स्वीकृत कराने में सोलर पैनल की अनिवार्यता की शर्त को शामिल करने को कहा गया है।
एलडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने कहा कि नेडा के सहयोग से 60 से 70 अपार्टमेंट में सोलर पैनल लगाने जा रहे हैं। कुछ अपार्टमेंट में तो इसे लगा दिया गया है। हैवेल्स के बिजनेस हेड विनय शेट्टी ने बताया कि सोलर एनर्जी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दैनिक जागरण के सहयोग से अगले तीन महीने यूपी के सभी बड़े शहरों में जाएंगे।



