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जन्मदिन पर मायावती ने योगी-अखिलेश की बढ़ाई टेंशन! करने लगीं 2007 वाली सोशल इंजीनियरिंग, खेला ‘सवर्ण’ कार्ड

Mayawati Plays Brahmin And Rajput Card On Her 70th Birthday Up Politics

UP Politics: बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर बड़ा सियासी संदेश दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के शीतकालीन सत्र के दौरान सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने आपस में बैठक की थी, जिसमें बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया गया। इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की भी बैठक हुई थी। मायावती ने कहा कि हाल के दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बसपा की सरकार बनने पर सवर्ण समाज को पूरा सम्मान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हमने हमेशा ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व दिया है। ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और किसी का ‘बाटी-चोखा’ नहीं खाना चाहिए। ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो, इसके लिए बीएसपी की सरकार जरूरी है।” मायावती ने यह भी कहा कि क्षत्रिय समाज को भी पार्टी में पूरा मान-सम्मान मिलेगा।

बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण

मायावती ने दावा किया कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ है और किसी को भी जातिवादी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का विवाद नहीं हुआ और न ही कोई दंगा हुआ।
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ‘सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय’ के सिद्धांत पर चली और कानून-व्यवस्था भी मजबूत रही।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बसपा सरकार की कई योजनाओं को बाद की सरकारों ने नाम बदलकर लागू किया। एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि इसका रोडमैप बसपा सरकार में ही तैयार हो गया था, और एक-दो एक्सप्रेसवे बन भी चुके थे।

अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा आने वाले सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी हर स्तर पर चुनाव की पूरी तैयारी कर रही है। अगर ईवीएम में धांधली नहीं होती तो नतीजे हमारे पक्ष में होंगे।”

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उन्होंने गठबंधन के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि गठबंधन से बसपा को नुकसान हुआ है, क्योंकि दलित वोट दूसरी पार्टी को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन दूसरी पार्टी का वोट बसपा को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव बसपा अकेले लड़ेगी और किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया जाएगा। भविष्य में गठबंधन पर विचार तभी होगा, जब यह भरोसा हो जाए कि सहयोगी दल अपना वोट पूरी तरह ट्रांसफर कर सकता है, लेकिन इसमें अभी लंबा समय लगेगा।

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