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2027 चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में सियासी भूकंप! मेरठ से आगरा तक लाखों वोटर लिस्ट से बाहर

2027 चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में सियासी भूकंप! मेरठ से आगरा तक लाखों वोटर लिस्ट से बाहर

UP Voter List Revision 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं. दरअसल, यूपी की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) ने खलबली मचा दी है. SIR के बाद जारी नई वोटर लिस्ट ने यह साफ कर दिया है कि आगामी चुनाव अब पुराने गणित पर नहीं लड़े जाएंगे. अकेले मेरठ, बरेली और आगरा जैसे जिलों को मिला दें तो लाखों की संख्या में मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं.

यह ‘कैंची’ न केवल मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में चली है, बल्कि भाजपा के उन ‘सेफ’ किलों पर भी चली है जहां से मंत्रियों और दिग्गजों की जीत तय मानी जाती थी. इस लिस्ट ना केवल सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ा दी है. बल्कि, विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है. बात अगर मेरठ जिले की करें तो यहां सातों विधानसभा सीटों पर EC का ‘चाकू’ इतना गहरा है कि अकेले इस जिले से करीब 6.65 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं. आंकड़ों का यह खेल बीजेपी के मजबूत किलों से लेकर विपक्ष के दबदबे वाली सीटों तक, हर जगह समीकरण बदलता दिख रहा है.

बीजेपी के ‘गढ़’ मेरठ कैंट में सबसे बड़ी मार
वोटर लिस्ट के ड्रॉफ्ट प्रकाशन के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. मेरठ कैंट, जिसे भाजपा का अभेद्य दुर्ग माना जाता है और जहां से पार्टी अमूमन एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीतती रही है, वहां सबसे ज्यादा 1,48,994 वोट कटे हैं. वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से 2027 में यहां ‘कांटे की टक्कर’ देखने को मिल सकती है.

मुस्लिम क्षेत्रों में गोलबंदी और 2.75 लाख को नोटिस
इस प्रक्रिया को लेकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में शुरुआत में डर का माहौल था, लेकिन अब वहां मतदाता और राजनीतिक दल अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं. एडवोकेट हैविंन खान के अनुसार, इस अभियान ने मुस्लिम समाज को एकजुट किया है ताकि वे अपने वोट सुरक्षित कर सकें. वहीं, प्रशासन ने लगभग 2.75 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया है जिनकी 2003 से मैपिंग नहीं मिल पा रही है.

विधानसभा वार कटे हुए वोटों का पूरा गणित
मेरठ की सातों सीटों पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:
मेरठ दक्षिण: 1,54,735 वोट कटे
मेरठ कैंट: 1,48,994 वोट कटे
मेरठ शहर: 89,057 वोट कटे
सरधना: 79,005 वोट कटे
किठौर: 64,740 वोट कटे
सिवालखास: 64,555 वोट कटे
हस्तिनापुर: 64,549 वोट कटे

मेरठ और सहारनपुर: गढ़ में मची हलचल
मेरठ की सातों सीटों पर करीब 6.65 लाख नाम कटे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ मेरठ कैंट से अकेले 1.48 लाख वोटर बाहर हो गए हैं. वहीं सहारनपुर में 4.32 लाख नाम हटे हैं, जिसमें सहारनपुर नगर सीट से सर्वाधिक 1.16 लाख नाम शामिल हैं. सरकार के मंत्रियों कुंवर बृजेश सिंह (देवबंद) और अनिल कुमार (रामपुर मनिहारान) की सीटों पर भी हजारों वोट कम हुए हैं.
मुरादाबाद और संभल, मंत्रियों और दिग्गजों की सीटें प्रभावित
मुरादाबाद मंडल में भी आंकड़ों ने चौंकाया है. मुरादाबाद जिले के 15.96% वोट कट गए हैं, जिसमें बीजेपी के गढ़ मुदाबाद सदर से सबसे ज्यादा 1.11 लाख नाम साफ हुए हैं. संभल जिले में कुल 3.18 लाख नाम कटे हैं. यहां शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी की चंदौसी सीट पर सबसे तगड़ी मार पड़ी है, जहां 99,093 वोट कम हुए हैं. सपा के गढ़ माने जाने वाले संभल सदर और असमोली में भी हजारों की संख्या में वोट कटे हैं.

बरेली-बदायूं: बीजेपी की बढ़ी बेचैनी
बरेली जिले में 7,16,509 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है. बरेली शहर और कैंट, दोनों बीजेपी की सीटें हैं और यहीं सबसे ज्यादा (क्रमशः 1.65 लाख और 1.34 लाख) वोट कटे हैं. बदायूं में भी 4.93 लाख नाम हटे हैं, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं.

आगरा और अलीगढ़ में भारी कटौती
ताजनगरी आगरा में निर्वाचन आयोग का अभियान सबसे व्यापक दिखा, जहां 8.38 लाख नाम हटे हैं. बीजेपी के कब्जे वाली आगरा की चारों शहरी सीटों पर भारी कटौती हुई है. अकेले आगरा कैंट से 1.81 लाख नाम हटाए गए हैं. अलीगढ़ में भी 5.20 लाख नाम कम हुए हैं.

रालोद के गढ़ और हाथरस-कासगंज की स्थिति
जयंत चौधरी के प्रभाव वाले बागपत जिले में 18.15% वोट कटे हैं, जिसमें बड़ौत सीट पर सबसे ज्यादा 19.96% की कटौती हुई है. हाथरस में 1.89 लाख और कासगंज में 1.72 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं. यहां भी बीजेपी के कब्जे वाली सदर सीटों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

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