
Khas Khas Benefits: गर्मियों में जब तेज धूप और चिलचिलाती लू शरीर को बेहाल कर देती है तब दादी-नानी का बताया एक पुराना नुस्खा खसखस संजीवनी का काम करता है। आयुर्वेद में पित्त नाशक मानी जाने वाली खसखस न केवल शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है बल्कि मानसिक तनाव को भी जड़ से मिटाती है।
वैज्ञानिक भाषा में पैपावर सोम्नीफेरम के नाम से जानी जाने वाली खसखस हजारों सालों से भारतीय रसोई और आयुर्वेद का अभिन्न हिस्सा रही है। खासकर गर्मियों के मौसम में जब शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है तब खसखस का सेवन रामबाण साबित होता है। इसकी ठंडी तासीर शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत कर तुरंत ताजगी और ऊर्जा प्रदान करती है।
पोषक तत्वों का पावर हाउस
दिखने में छोटे ये सफेद दाने असल में सेहत का खजाना हैं। खसखस में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे महत्वपूर्ण तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह न केवल हड्डियों को मजबूती देता है बल्कि इसमें मौजूद तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं। फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाकर यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
पेट की समस्याओं से छुटकारा
गर्मियों में अक्सर लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन और पैरों के तलवों में जलन की शिकायत रहती है। खसखस का शरबत या दूध इन समस्याओं में तुरंत राहत देता है। यह पेट के एसिड लेवल को संतुलित करता है और फाइबर से भरपूर होने के कारण पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। भीषण गर्मी में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर वाटर लेवल को मेंटेन रखने में मदद करता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
सेहत के साथ-साथ खसखस सुंदरता निखारने में भी कारगर है। इसे दूध के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से गर्मी के कारण होने वाले मुंहासे और जलन कम होती है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की सूजन को शांत करते हैं। साथ ही जिन लोगों को गर्मी के कारण नींद न आने या तनाव की समस्या है उनके लिए खसखस का दूध एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है जो गहरी नींद लाने में सहायक है।
खसखस का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। चूंकि यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और रक्त शुद्ध करने में मदद करता है इसलिए यह एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक भी है। हालांकि यदि आपको किसी प्रकार की एलर्जी है तो सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।



