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रीवा: 10 साल, 4 कलेक्टर और ‘अम्मा’ का अधूरा इंसाफ; अब कलेक्ट्रेट में आत्मदाह की चेतावनी

रीवा : प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच रीवा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है.मनगवां तहसील के ग्राम घोपी की एक वृद्ध महिला पिछले एक दशक से न्याय की आस में कलेक्ट्रेट की सीढ़ियां घिस रही हैं। इस दौरान जिले की कमान 4 कलेक्टरों के हाथों में बदली, लेकिन नहीं बदली तो ‘अम्मा’ की किस्मत.

 

थक-हारकर अब पीड़ित महिला ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायती पत्र सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह करने को विवश होंगी.

40 साल का आशियाना, अब दबंगों की टेढ़ी नजर
पीड़िता ने बताया कि उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से शासकीय भूमि पर कच्चा मकान बनाकर रह रहा है। आरोप है कि गांव के ही कुछ रसूखदार और दबंग अब उन्हें इस जमीन से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं.दबंगों के डर से पूरा परिवार साये में जीने को मजबूर है, लेकिन स्थानीय प्रशासन मौन साधे बैठा है.

 

27 जनवरी को कलेक्ट्रेट पहुँची महिला ने अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाते हुए सरकारी तंत्र पर भी निशाना साधा.उनका आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत और कथित भ्रष्टाचार के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। सालों से चल रही इस कानूनी और प्रशासनिक जंग ने वृद्ध महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया है.

 

चेतावनी: “न्याय नहीं मिला तो खत्म कर लूंगी जीवन”
शिकायती पत्र के माध्यम से महिला ने स्पष्ट कहा है कि वे अब और दर-दर की ठोकरें नहीं खा सकतीं.प्रशासन की नाक के नीचे गरीब की जमीन छीनने की कोशिश हो रही है.उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी सुरक्षा और जमीन के हक में फैसला नहीं लिया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय के समक्ष ही आत्मदाह कर लेंगी.

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