
जब तकनीक और संस्कृति का मिलन होता है, तो दुनिया हैरान रह जाती है. कुछ ऐसा ही इन दिनों इंटरनेट पर देखने को मिल रहा है, जहां ‘माया’ नाम के एक ह्यूमनॉइड रोबोट (Humanoid Robot Maya) ने मराठी के सुपरहिट गाने ‘वाजले की बारा’ पर गजब का भारतीय शास्त्रीय नृत्य पेश किया है. इस अनोखे और अद्भुत प्रदर्शन को देखकर सोशल मीडिया पर लोग कह उठे हैं- ‘माया तो छा गई.’
यूनिट्री जी1 प्लेटफॉर्म पर तैयार हुई ‘माया’ का देसी अवतार
इस रोबोटिक चमत्कार के पीछे भारत के ट्यूजडे लैब्स और मास्टर्स यूनियन के होनहार छात्रों की टीम है, जिसके बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘जिकिगाय’ के नाम से मशहूर सोहन राय ने जानकारी साझा की. उन्होंने इसे दुनिया का पहला ऐसा भारतीय शास्त्रीय नृत्य बताया है जिसे किसी मानव जैसे दिखने वाले रोबोट ने परफॉर्म किया है.
माया को पूरी तरह से भारतीय रंग में ढालने के लिए चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री के ‘जी1’ (Unitree G1) ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, रोबोट का सॉफ्टवेयर, वॉयस सिस्टम और गतिविधियां पूरी तरह कस्टमाइज्ड हैं. इसे पारंपरिक भारतीय कपड़े, विशेष जूते, गहने और 3डी-प्रिंटेड कमरबंद के साथ-साथ मानव बालों की विग पहनाकर एक परफेक्ट क्लासिकल डांसर का लुक दिया गया है.
मोशन-कैप्चर तकनीक और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग का कमाल
रोबोट से क्लासिकल डांस करवाना कोई बच्चों का खेल नहीं था. इसे संभव बनाने के लिए डेवलपर्स ने सबसे पहले मोशन-कैप्चर तकनीक (Motion-Capture Technology) का इस्तेमाल करके एक असली शास्त्रीय नर्तकी के डांस मूव्स को रिकॉर्ड किया.
इसके बाद रीइन्फोर्समेंट लर्निंग (Reinforcement Learning) के जरिए माया को बिना अपना संतुलन खोए इन कठिन कदमों को बार-बार दोहराने की ट्रेनिंग दी गई. यही वजह है कि वीडियो में माया मराठी गाने की धुन पर बेहद सहजता और सफाई के साथ थिरकती हुई नजर आती है.
वीडियो पर छिड़ी बहस
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है. जहां एक तरफ लोग इस टेक्नोलॉजी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कला प्रेमियों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है. एक यूजर ने लिखा, क्या माया है ये, वाह. दूसरे ने कमेंट किया, केवल तकनीकी क्षेत्र के लोग ही समझते हैं कि यह कोई मजाक नहीं है, बल्कि बेहद सराहनीय है.
इसके विपरीत एक क्लासिकल डांसर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं इसके पीछे की मेहनत की सराहना करती हूं, लेकिन रोबोट सिर्फ कदम उठा सकता है, उसमें वह इंसानी गरिमा और दर्शकों के साथ जुड़ाव की भावना कभी नहीं आ सकती. एक अन्य यूजर ने लिखा कि रोबोट्स को घर के काम संभालने चाहिए, कला के क्षेत्र में इंसानी रचनात्मकता का कोई विकल्प नहीं हो सकता.



