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‘जेल भेज दो मुझे…’, पति की हत्या कर 20 KM दूर फेंकी लाश, फिर खुद पहुंची थाने; देवर ने खोल दिया भाभी का खौफनाक राज

‘जेल भेज दो मुझे…’, पति की हत्या कर 20 KM दूर फेंकी लाश, फिर खुद पहुंची थाने; देवर ने खोल दिया भाभी का खौफनाक राज

बिहार पूर्णिया में रिश्तों के कत्ल की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई है. यहां कसबा थाना क्षेत्र के राधानगर मुहल्ले में 40 वर्षीया सुनीता देवी ने अपने 47 वर्षीय पति उमेश कुमार सिंह की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर डाली. हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए उसने शव को बोरे में बंद किया और अपने सहयोगियों की मदद से घर से 20 किलोमीटर दूर अमौर थाना क्षेत्र के पलसा घाट के पास फेंक दिया.

इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब आरोपी पत्नी सुनीता देवी खुद के हाट थाने पहुंची. वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया. उसने चीख-चीख कर कहा कि उसने अपने पति को मार डाला है और अब उसे जेल भेज दिया जाए. उसकी बातें सुनकर पुलिस सन्न रह गई. आनन-फानन में के हाट पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और कसबा पुलिस को मामले की जानकारी दी.

खून से सना मिला घर, बोरे में मिला शव

घटना का खुलासा तब शुरू हुआ जब बुधवार सुबह मृतक का छोटा बेटा पीयूष घर पहुंचा. कमरे के फर्श, बरामदे और तकिए पर खून के धब्बे देखकर उसके होश उड़ गए, लेकिन पिता घर से गायब थे. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया. जांच के दौरान पता चला कि अमौर पुलिस को सड़क किनारे एक बोरे में बंद अज्ञात शव मिला है. जब परिजनों को तस्वीर दिखाई गई, तो उसकी पहचान उमेश कुमार सिंह के रूप में हुई.

दंपति में पैसों को लेकर विवाद

पुलिस की प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे का कारण उभर कर सामने आया है. मृतक के भाई महेश के अनुसार, उमेश ने ग्रुप लोन अपनी पत्नी के नाम पर उठाया था. कर्ज चुकाने के लिए बार बार उमेश अपनी पत्नी से पैसे मांग रहा था. इसी बात से नाराज होकर भाभी ने उमेश को मार डाला.

पुलिस ने की कार्रवाई

सदर एसडीपीओ टू राजेश कुमार और कसबा थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन ने घटनास्थल का मुआयना किया है. चूंकि शव अमौर थाना क्षेत्र से बरामद हुआ है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया वहीं से शुरू की जा रही है. पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस हत्याकांड और 20 किमी दूर शव को ठिकाने लगाने में सुनीता की मदद किन-किन लोगों ने की. यह घटना दर्शाती है कि कैसे अवैध संबंध और घरेलू विवाद एक हंसते-खेलते परिवार को श्मशान और जेल तक पहुंचा सकते हैं.

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