
Anu Aggarwal: जिंदगी में कुछ हादसे इंसान को पूरी तरह तोड़ देते हैं, तो कुछ नए सबक सिखाकर पहले से भी मजबूत बना देते हैं। साल 1999 में हुए एक भीषण कार एक्सीडेंट के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री अनु अग्रवाल की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई थी। हालांकि, ‘आशिकी गर्ल’ के नाम से मशहूर अनु इस भयावह घटना को कोई गहरा जख्म नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की एक नई और सकारात्मक शुरुआत मानती हैं।
फिल्म ‘आशिकी’ से रातों-रात बनीं अनु अग्रवाल ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने जीवन के संघर्ष और योग के प्रति अपने समर्पण को लेकर गहरी भावनाएं व्यक्त की हैं।
योग और आध्यात्मिकता से मिली नई दिशा
अनु अग्रवाल ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर के साथ सकारात्मक विचार साझा करते हुए बताया कि उन्होंने योग के माध्यम से जीवन में ठहराव और मौजूदगी को महसूस किया है। उन्होंने लिखा, “मैंने योग के बारे में बात की, लेकिन मैंने असल में जो साझा किया, वह एक ऐसी जिंदगी थी जो असर, ठहराव और मौजूदगी से बनी थी। अब जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो मुझे यह साफ दिखता है कि वह हादसा कोई जख्म नहीं था, वह एक शुरुआत थी।”
ये भी पढ़ें-
29 दिन कोमा और मौत को मात देने की कहानी
साल 1999 में जब अनु का करियर अपने चरम पर था, तब एक कार एक्सीडेंट ने सबकुछ बदल दिया। इस हादसे में वे इतनी गंभीर रूप से घायल हुईं कि 29 दिनों तक कोमा में रहीं। उनके चेहरे, जबड़े और शरीर पर गंभीर चोटें आईं, यहाँ तक कि उनका आधा शरीर लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो गया था। डॉक्टरों के लिए भी उनकी रिकवरी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। लेकिन अनु ने हार मानने के बजाय योग, ध्यान और आध्यात्मिकता का सहारा लिया और खुद को फिर से खड़ा किया।
फिल्मी दुनिया से दूरी और समाज सेवा
पूरी तरह ठीक होने के बाद ने चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली और एक योगा टीचर बनने का फैसला किया। आज वे अपना खुद का एक फाउंडेशन चलाती हैं, जहाँ वे वंचित बच्चों और महिलाओं को योग और मानसिक मजबूती का पाठ पढ़ाती हैं। उन्होंने अपनी प्रेरणादायक आत्मकथा ‘अनयूजवल: मेमोइर ऑफ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम डेड’ भी लिखी है, जो संघर्ष कर रहे लाखों लोगों के लिए एक मशाल की तरह है।



