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रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा सोनीपत का इकलौता सहारा! अंकित का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा सोनीपत का इकलौता सहारा! अंकित का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

सोनीपत: सोनीपत के गांव कुराड का रहने वाला 26 साल का नौजवान युवक अंकित अपने परिजनों को समझा बुझाकर करीब एक एकड़ जमीन बेचकर साल 2025 में कुछ रुपए लेकर रूस में पढ़ाई करने पहुंच गया और वहां उसने एक होटल में पहले तो नौकरी करनी शुरू की। बाद में जब रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ तो हजारों भारतीय नौजवानों के साथ साथ रूसी सेना ने अंकित को भी जबरदस्ती अपनी सेना में भर्ती कर लिया और उसे कुछ ही महीने की ट्रेनिंग के बाद हथियार थमा कर यूक्रेनी सेना से लड़ने के लिए सीमा पर भेज दिया गया, जैसे उसके परिवार ने बताया कि रूसी सेना ने उसे जबरदस्ती भर्ती किया और भर्ती ना होने की एवज में उसे आतंकवादी घोषित करने की धमकी दी गई।

उसी धमकी से डरते हुए उसने रूसी सेना का साथ दिया। करीब छह माह से उसका संपर्क उसके परिजनों से नहीं हो रहा था और उसके परिजन इसको लेकर बेचैन हो रहे थे कि कही कोई अनहोनी ना हो गई हो और हुआ भी ऐसा ही। अब उनका लाल उनके साथ नहीं है, बस उसका शव आज गांव कुराड में पहुंचा और उसके शव से लिपट पर उसके मां-बाप और बहनें आंसू नहीं रोक पा रही थी। वहीं उसके परिजनों ने सरकार से अन्य युवकों के रेस्क्यू की गुहार लगाई है ताकि भारत के किसी अन्य मां-बाप को यह दिन ना देखना पड़े।

आज जब अंकित का शव गांव पहुंचा तो उसके परिजनों में विधि विधान से उसके शव का दाह संस्कार किया। अंकित की बहन अन्नू ने रोते हुए बताया कि उसका भाई पढ़ाई करने के लिए रूस गया था और उसे जबरदस्ती वहां सेना में भर्ती करवाया गया। मेरी सरकार से गुहार है कि सभी भारतीयों को वहां से जल्द से जल्द निकला जाए, ताकि किसी अन्य परिवार के साथ ये अनहोनी ना घटे। वहीं अंकित के मामा संजय और पवन ने उसकी मौत के साथ-साथ रूस जाने की पूरी जानकारी सांझा की।

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