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मजहब की दीवार ढही, प्यार की जीत हुई: हिंदू रीति-रिवाज से मुस्लिम दुल्हनिया ने लिए सात फेरे, हर तरफ हो रही चर्चा

मजहब की दीवार ढही, प्यार की जीत हुई: हिंदू रीति-रिवाज से मुस्लिम दुल्हनिया ने लिए सात फेरे, हर तरफ हो रही चर्चा

उत्तर प्रदेश के रायबरेली से प्रेम और आपसी सहमति की एक अनोखी कहानी सामने आई है, जहां एक प्रेमी युगल ने धर्म की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए मंदिर में सात फेरे लेकर विवाह कर लिया. यह मामला रायबरेली और अमेठी जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है.

जानकारी के अनुसार, अमेठी जनपद की रहने वाली रेशम बानो और रायबरेली के शहर कोतवाली क्षेत्र के बैरहना मोहल्ला निवासी अभिषेक सोनकर की मुलाकात करीब तीन साल पहले हुई थी. यह मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए. समय के साथ उनका रिश्ता इतना मजबूत हो गया कि उन्होंने एक साथ जीने-मरने की कसमें खा लीं.

बताया जा रहा है कि अभिषेक सोनकर ने जेल रोड स्थित एक मंदिर में रेशम बानो को बुलाकर विवाह का प्रस्ताव रखा. दोनों ने आपसी सहमति से शादी करने का फैसला किया और मंदिर परिसर में ही हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सात फेरे लेकर एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार कर लिया. इस दौरान दोनों की रजामंदी से विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं.

शादी करके क्या बोली रेशमा?

सूत्रों के मुताबिक, रेशम बानो ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म स्वीकार किया है. रेशम का कहना है कि उसने यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने प्रेम और विश्वास के आधार पर लिया है. रेशम बानो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अभिषेक से प्यार करती है और उसी के साथ जीवन बिताना चाहती है, इसलिए उसने स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया.

लव मेरिज की हो रही चर्चा

इस विवाह की खबर जैसे ही सामने आई, रायबरेली से लेकर अमेठी तक इसकी चर्चाएं शुरू हो गईं. कुछ लोग इसे प्रेम की जीत बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक परंपराओं को चुनौती देने वाला कदम मान रहे हैं. हालांकि, दोनों का कहना है कि उन्होंने पूरी समझदारी और सहमति से यह निर्णय लिया है. फिलहाल यह प्रेम विवाह इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इसे बदलते सामाजिक सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में भी देख रहे हैं.

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