CricketIndia

महिलाओं की ये 4 आदतें तय करती हैं घर का भविष्य, या तो घर बनेगा स्वर्ग या फिर छा जाएगी कंगाली!

महिलाओं की ये 4 आदतें तय करती हैं घर का भविष्य, या तो घर बनेगा स्वर्ग या फिर छा जाएगी कंगाली!

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति सदियों बाद भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी वह पहले थी. चाणक्य ने अपनी नीतियों में न सिर्फ राजनीति और कूटनीति, बल्कि पारिवारिक जीवन और व्यक्तिगत आचरण को लेकर भी जिक्र किया है. आचार्य चाणक्य का मानना था कि एक महिला अपने स्वभाव और आदतों से पूरे कुल का भाग्य बदल सकती है. चाणक्य नीति में चाणक्य कहते हैं कि 4 विशेष गुणों से युक्त महिला घर को स्वर्ग जैसा बनाकर रखती हैं. ऐसे घरों में कभी दरिद्रता का वास नहीं होता. ऐसे में आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार महिलाओं की उन गुणों और अवगुणों के बारे में.

परिश्रमी स्वभाव
आचार्य चाणक्य के अनुसार, परिश्रम ही वह कुंजी है जो सौभाग्य के द्वार खोलती है. जो महिला कर्मठ और जुझारू होती है, वह कठिन से कठिन समय में भी अपने परिवार की ढाल बनकर खड़ी रहती है. इसके विपरीत, आलसी स्वभाव न सिर्फ प्रगति को रोकता है, बल्कि घर में दरिद्रता को भी निमंत्रण देता है. आलस्य व्यक्ति की बुद्धि को खराब कर देता है.

बचत की कला
चाणक्य नीति कहती है कि एक बुद्धिमान स्त्री वही है जो धन के महत्व को समझे. जो महिलाएं संकट के समय के लिए बचत करने की आदत रखती हैं, उनके घर में कभी कंगाली नहीं आती. इसके उलट, बिना सोचे-समझे व्यर्थ खर्च करने की आदत अच्छे-खासे अमीर परिवार को भी अर्श से फर्श पर ले आती है.

सच्चाई और ईमानदारी
सच्चाई और ईमानदारी किसी भी महिला के व्यक्तित्व के सबसे अनमोल आभूषण होते हैं. चाणक्य के अनुसार, जो महिला सत्य बोलती है और जिसका हृदय छल-कपट से मुक्त होता है, उसे समाज में देवी जैसा सम्मान प्राप्त होता है. वहीं, झूठ और प्रपंच का सहारा लेने वाली महिलाएं न सिर्फ अपना मान खो देती हैं, बल्कि अपनों का विश्वास भी खो देती हैं.

धैर्य और क्रोध पर विजय
विपरीत परिस्थितियों में जो महिला अपना धैर्य नहीं खोती, वह हर युद्ध जीत लेती है. क्रोध को चाणक्य ने मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु माना है. अत्यधिक क्रोध करने वाली महिला न सिर्फ अपनी सेहत बिगाड़ती है, बल्कि घर की सुख-शांति को भी तहस-नहस कर देती है. संयम ही वह शक्ति है जो स्त्री को रानी की तरह सम्मानित बनाती है.

ज्ञान के प्रति जिज्ञासा
समय के साथ कदम मिलाकर चलना ही बुद्धिमानी है. चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री नई चीजें सीखने और खुद को शिक्षित करने की इच्छा रखती है, वह कभी पीछे नहीं रहती. ज्ञान के अभाव में व्यक्ति का विकास रुक जाता है. एक शिक्षित और जागरूक महिला न सिर्फ खुद का, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी सही रास्ते पर ले जाती है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply