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UPI Record: डिजिटल इंडिया का दम! सालभर में हुआ 300 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन, टूटा पिछला रिकॉर्ड

UPI Record: डिजिटल इंडिया का दम! सालभर में हुआ 300 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन, टूटा पिछला रिकॉर्ड

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने वित्त वर्ष 2026 में एक और बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है. पूरे साल में यूपीआई के जरिए 308 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन हुए, जो इसकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है. मार्च 2026 में ही ट्रांजैक्शन वैल्यू 30 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई. इसका मतलब है कि हर दिन औसतन करीब 1 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन यूपीआई के जरिए हो रहा है, जो डिजिटल इंडिया की ताकत को दिखाता है.

मार्च में रिकॉर्ड ट्रांजैक्शन

मार्च 2026 में यूपीआई ने 29.53 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन किए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है. इस दौरान 22.6 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो एक नया रिकॉर्ड है. पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कुल ट्रांजैक्शन 241.6 अरब तक पहुंच गए. यह दिखाता है कि देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, पूरे साल में रोजाना औसतन 84,500 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो डिजिटल पेमेंट सिस्टम की मजबूती को दर्शाता है.

ग्रोथ रेट धीमी, लेकिन विस्तार लगातार जारी

यूपीआई की ग्रोथ जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है. वित्त वर्ष 2026 में ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले साल यह 30 प्रतिशत थी. इससे पहले के साल में ग्रोथ 40 प्रतिशत तक रही थी. विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे जैसे यूपीआई ज्यादा लोगों तक पहुंच रहा है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, वैसे वैसे ग्रोथ रेट सामान्य हो रहा है. फिर भी कुल वैल्यू और ट्रांजैक्शन की संख्या लगातार बढ़ रही है.

छोटे व्यापारियों से बढ़ी रफ्तार

यूपीआई के विस्तार में छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की बड़ी भूमिका रही है. कुल ट्रांजैक्शन में करीब 62 प्रतिशत हिस्सा मर्चेंट पेमेंट का है, लेकिन वैल्यू के मामले में पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन अभी भी ज्यादा है. मर्चेंट पेमेंट का बड़ा हिस्सा 500 रुपये से कम के ट्रांजैक्शन का है, जिससे कुल वैल्यू कम रहती है. दूसरी तरफ, पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन में बड़ी रकम के लेनदेन ज्यादा होते हैं, जिससे कुल वैल्यू ज्यादा बनती है. यही कारण है कि छोटे शहरों और गांवों में यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

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