
GST अफसर प्रशांत सिंह पर फेक दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरी पाने का आरोप.
उत्तर प्रदेश में अधकारियों का इस्तीफा इस समय सुर्खियों में है. इसी में अयोध्या के GST अफसर प्रशांत कुमार सिंह का भी इस्तीफा चर्चा का केंद्र बन गया है, लेकिन किसी और वजह से. वजह उनके भाई द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप. उनके बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने कहा कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाकर नौकरी पाई. 5 साल पहले उन्होंने इसकी शिकायत की थी. मेडिकल बोर्ड के सामने प्रशांत को पेश होना था, लेकिन वह पेश नहीं हुए. ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रशांत को पता है कि नौकरी जानी तय है. इसके बाद जो रिकवरी होगी, वह वो भर नहीं पाएंगे. इसी रिकवरी से बचने के लिए उन्होंने इस्तीफे का नाटक रचा.
हालांकि इन सबके बीच एक सवाल लोगों के मन में उठा कि आखिर भाई ही भाई की नौकरी खाने पर क्यों तुला है? GST अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह और विश्वजीत सिंह में ऐसी क्या दुश्मनी है, जो विश्वजीत सिंह ने उसको बर्बाद करने की कमस खा ली है? नाम न छापने की शर्त पर ये जानकारी दी परिवार के एक करीबी व्यक्ति ने….
“बड़ा बेटा होने के बावजूद कुछ कर नहीं पाया. किसी ने मेरी मदद भी नही की”… “विश्वजीत सिंह को हमेशा ये बात चोट पहुंचाती थी. इसी चोट ने जो जख्म दिया, विश्वजीत इससे उबर नहीं पाया. यही वजह रही कि बाप, भाई और बहन सबको तबाह करने पर लग गया.”… ये कहना है मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के सरवा गांव निवासी एक व्यक्ति का, जो त्रिपुरारी सिंह (प्रशांत कुमार सिंह और विश्वजीत सिंह के पिता) के परिवार को करीब से जानता है, लेकिन सामने नहीं आना चाहता.
कोविड में सबकुछ बदल गया
“ये भी बेहद चौंकाने वाला है कि GST अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह और उनकी तहसीलदार बहन जया सिंह की नौकरी पर आफत लाने वाले उनके सगे भाई विश्वजीत सिंह ही हैं. त्रिपुरारी सिंह को बेहद करीब से जाने वाले उस व्यक्ति ने कहा कि, “ऐसा नहीं है कि विश्वजीत सिंह हमेशा से ऐसा था. एक जमाने में त्रिपुरारी सिंह को बड़े बेटे पर पूरा भरोसा था. जब वो देवरिया से वापस आया तो त्रिपुरारी सिंह ने ही गिट्टी-बालू की दुकान खुलवा दी, लेकिन कोराना काल ने सब कुछ बदल के रख दिया.”
“कोविड की वजह से कारोबार में घाटा लगा. इस दौरान त्रिपुरारी सिंह ने भी एक बड़ी गलती की, जो उन्होंने अपने जीते जी संपत्ति दोनों बेटों के नाम कर दी. विश्वजीत सिंह को लगा कि जमीन का एक टुकड़ा बेच कर कोई दूसरा कारोबार करेगा, लेकिन त्रिपुरारी सिंह की जिद थी कि उनके जीते जी पुश्तैनी जमीन का एक धुर तक नहीं बिकने देंगे. विश्वजीत सिंह ने जमीन बेचने के लिए ग्राहक बुलाए थे. ग्राहक के ही सामने त्रिपुरारी सिंह ने उसको बुरा भला कहने लगे.”
पिता पर ही विश्वजीत सिंह ने हाथ उठा दिया था
“विश्वजीत सिंह से ये देखा नहीं गया. उसने सबके सामने ही बाप पर हाथ उठा दिया. यहीं से विश्वजीत सिंह घर में सबसे बुरा हो गया. छोटा बेटा प्रशांत कुमार सिंह और बहन जया सिंह अपने पिता की तरफ खड़े थे. विश्वजीत सिंह को लगा कि वो जिंदकी में असफल हो गया है. इसी वजह से भाई-बहन भी उससे किनारा कर लिए हैं.”
भाई-बहन को बर्बाद करने की कसम खाई!
बस फिर यहीं से उसने भाई और बहन दोनों को बर्बाद करने की कसम खा ली. उसने छोटे भाई और बहन के खिलाफ फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप लगाना शुरू किया. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशांत कुमार सिंह ने आंखों की एक ऐसी बीमारी का सर्टिफिकेट बनवाया है, जो 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति को हो ही नहीं सकती. साल 2021 में उसने इसकी शिकायत की. शिकायत के बाद प्रशांत बार-बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने से बचते रहे.
विश्वजीत सिंह ने कहा कि 20 अगस्त 2021 को मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत कुमार सिंह को मेडिकल जांच के लिए बुलाया था. इसके बाद भी उन्हें कई बार मौका दिया गया, लेकिन वे बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हुए. इसी बीच 2023 में पिता त्रिपुरारी सिंह के कहने पर प्रशांत कुमार सिंह ने भी विश्वजीत के खिलाफ सरायलखंसी थाने में मुकदमा दर्ज कराया.
प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा महज नाटक
विश्वजीत सिंह का आरोप है कि प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा देना महज एक नाटक है, ताकि विभाग द्वारा होने वाली संभावित जांच और रिकवरी से बचा जा सके.वहीं विश्वजीत सिंह के आरोपों के बाद इस मामले में CMO मऊ ने जांच शुरू कर दी है, जिससे प्रशांत के इस्तीफे की टाइमिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं. विश्वजीत सिंह ने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो प्रशांत की नौकरी जाना तय है.
वहीं बड़े भाई के आरोपों पर तहसीलदार बहन जया सिंह का भी बयान आया है. उनका कहना है कि भाई विश्वजीत सिंह के द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं. हमारा कुछ पारिवारिक विवाद चल रहा है. मामले की जांच करवाई जाए.




