

हर महीने में एक अमावस्या तिथि पड़ती है, लेकिन सभी में वैशाख अमावस्या काफी महत्वपूर्ण मानी गई है। इस अमावस्या पर स्नान, तर्पण और दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सत्तू का दान बहुत ही शुभ माना जाता है। इसी कारण से इसे सतुवाई अमावस्या भी कहते हैं। इस अमावस्या पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं। कहते हैं इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। चलिए जानते हैं इस साल वैशाख अमावस्या कब मनाई जाएगी।
अप्रैल में अमावस्या कब है?
अप्रैल में वैशाख अमावस्या मनाई जाएगी। जिसका प्रारंभ 16 अप्रैल की रात 08:11 से होगा और समापन 17 अप्रैल की शाम 05:21 बजे होगा। उदया तिथि अनुसार ये अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
वैशाख अमावस्या पर क्या करना चाहिए?वैशाख अमावस्या के दिन फलाहारी व्रत रखना चाहिए।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि ऐसा कर पाना संभव नहीं है तो नहाने के पानी में ही थोड़ा सा गंगाजल व तिल मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से भी पुण्य फल प्राप्त हो जाएगा।
स्नान के बाद सूर्य को जल में तिल डालकर अर्पित करना चाहिए।
इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए।
इस दिन पितरों के नाम से जरूरतमंदों को भोजन करवाना चाहिए। साथ ही उन्हें वस्त्रों का दान करना चाहिए।इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए। इससे देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैशाख अमावस्या में क्या नहीं करना चाहिए?इस दिन मांसाहार से दूर रहना चाहिए।
उड़द या इससे बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।
अमावस्या पर मांगलिक कार्य या शुभ कामों के लिए खरीदारी करने से बचना चाहिए।
इस दिन नए काम की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों में सफलता नहीं मिलती।



