मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. बीजेपी ने यहां अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतार दिया है. पार्टी ने महेश केवट को टिकट दिया है. केवट ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था. इस दौरान उनके साथ सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद थे. सभी नेताओं ने जीत का दावा किया था. इधर बीजेपी के तीसरे कैंडिडेट उतारने से कांग्रेस के खेमे में हड़कंप मच गया है. आइये जानते हैं कि आखिर कौन हैं महेश केवट? जिन पर बीजेपी ने राज्यसभा की तीसरी सीट का दांव लगाकर कांग्रेस के खेमे में खौफ पैदा कर दिया है.

दरअसल मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है. विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से 3 खाली सीटों में से 2 पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी. बीजेपी ने दो सीटों के लिए पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम का ऐलान पहले ही कर दिया था. दोनों नेताओं ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. जबकि कांग्रेस ने एक मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है. वहीं ऐन वक्त पर बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार का भी नामांकन करा दिया जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है. केवट को उतार कर बीजेपी ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है.ऐसे में अब कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराने लगा है.
महेश केवट का सफर
महेश केवट की बात करें तो वो मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं. बीजेपी ने महेश केवट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर मछुआरा समुदाय को साधने की कोशश की है. 1984 से महेश केवट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं. वो ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक रह चुके हैं. छात्र जीवन में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ब्लॉक संयोजक के रूप में कार्य किया. इसके साथ ही वो विश्व हिंदू परिषद की निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव भी रहे.
1995 से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं
महेश केवट 1995 से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम कर चुके हैं. 1998 तक बीजेपी जिला कार्यसमिति के सदस्य रहे. 2000 में स्थानीय निकाय चुनाव में पार्षद चुने गए. वो नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे. बीजेपी के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर उपचुनावों में संगठन की तरफ से अहम जिम्मेदारियां संभालीं.
केवट समाज के बड़े चेहरे
बीजेपी महेश केवट को एक ऐसे जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पेश कर रही है, जिसने स्थानीय स्तर से उठकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है. केवट समाज के बड़े चेहरे को उतारकर बीजेपी ने बुंदेलखंड में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की चाल चली है.
जीत को लेकर बीजेपी आश्वस्त
महेश केवट की जीत को लेकर पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है. केवट के नामांकन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि भविष्य में हम अपनी तीनों राज्यसभा की सीटों से निर्वाचित होकर रहेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी पार्टी कहती नहीं है बल्कि सीधा करके दिखाती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देकर सभी वर्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है.
केवट ने जताया आभार
वहीं महेश केवट ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जो जिम्मेदारी हमें दी है, राज्यसभा का जो टिकट दिया है, निश्चित ही हम राज्यसभा जाएंगे और जनता की सेवा का जो मौका मिलेगा उसके लिए मैं उनका आभारी हूं. प्रदेश नेतृत्व, राष्ट्रीय नेतृत्व का मैं आभार व्यक्त करता हूं.
कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर
इधर मध्य प्रदेश कांग्रेस भले ही एकजुटता की बात कर रही हो लेकिन उसे क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है. यही वजह है कि पार्टी
अपने विधायकों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने की तैयारी में है. सूत्रों की मानें तो पार्टी विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी कर रही है, जहां कांग्रेस की सरकार है. बताया जा रहा है आज कांग्रेस अपने विधायकों को विशेष विमान से कर्नाटक भेज सकती है.
विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट करने की तैयारी
खबर है कि आज दोपहर 12 बजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बंगले सभी विधायक पहुंचेंगे. इसके बाद उन्हें कर्नाटक में शिफ्ट किया जाएगा. बताया जा रहा है कि विधायक अपने साथ परिवार के सदस्यों को साथ ले जा सकते हैं, लेकिन स्टाफ को नहीं .
कांग्रेस के पास 62 वोट
दरअसल मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 62 वोट हैं. एक सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए. उधर बीजेपी को तीसरी सीट जीतने के लिए सिर्फ 8 अतिरिक्त वोट चाहिए.यही वजह है कि कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को अपने वोटों को एकजुट रखना जरूरी है. यही वजह है कि कांग्रेस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.



