
लखनऊ। बीती 29 मार्च को नोएडा के दादरी में गुर्जरों का जमावड़ा और इसी दिन मेरठ में जाट राजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के बाद से पश्चिम उत्तर प्रदेश में राजनीतिक लू चलने लगी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दिए बयानों से भाजपा की जाट राजनीति में हलचल है।
इसे लेकर पार्टी और गठबंधन के अंदर से कई विरोधी स्वर फूटे, जिसमें एक स्वर रालोद अध्यक्ष जयन्त चौधरी का भी है। वहीं दोराहे पर खड़ी गुर्जर राजनीति अपना ‘चौधरी’ तलाश रही है।
13 अप्रैल को दोनों करेंगे जनसभा
इन्हीं चर्चाओं के बीच 13 अप्रैल को योगी और जयन्त मुजफ्फरनगर शहर में जनसभा कर नई पटकथा लिख सकते हैं। चुनावी वर्ष में भाजपा के कई जाट नेताओं की बेचैनी बढ़ी है। वहीं पार्टी गुर्जर जनप्रतिनिधियों से बात कर समाज का मलाल दूर करने के फार्मूले पर काम रही है।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर दोनों सबसे प्रभावशाली राजनीतिक फैक्टर हैं। वर्ष 2014 के लोक सभा और 2017 में विधान सभा चुनाव के दौरान जाट और गुर्जर दोनों भाजपा के पक्ष में आए लेकिन 2019 के लोक सभा व 2022 के विधान सभा चुनाव में जाटों का बड़ा वोट रालोद के पास वापस जाता दिखाई पड़ा।



