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Yusuf Pathan Plot case: यूसुफ पठान किस प्लॉट के चक्कर में फंसे? गुजरात हाई कोर्ट ने भी लगाई फटकार

टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गुजरात हाई कोर्ट ने वडोदरा में अतिक्रमण के मामले में उन्हें फटकार लगाई है. कोर्ट ने पठान से पूछा कि आप औपचारिकताएं पूरी किए बिना किसी प्लॉट में कैसे प्रवेश कर सकते हैं? अदालत ने कहा है कि जमीन देने की कोई तय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, बल्कि सिर्फ एक प्रस्ताव था, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था.

Yusuf Pathan Plot case: यूसुफ पठान किस प्लॉट के चक्कर में फंसे? गुजरात हाई कोर्ट ने भी लगाई फटकार
Yusuf Pathan Plot case: यूसुफ पठान किस प्लॉट के चक्कर में फंसे? गुजरात हाई कोर्ट ने भी लगाई फटकार

चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ ने ये भी कहा कि औपचारिकताएं पूरी किए बिना सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई छूट नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने पठान के वकील से पूछा है कि जमीन खाली करने में कितना समय लगेगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में जुर्माना लगाने के संकेत भी दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी.

सिंगल जज के आदेश को दी थी चुनौती

पठान ने हाईकोर्ट के सिंगल जज के अगस्त 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अतिक्रमणकारी पाया गया. जज ने सरकारी जमीन पर कब्जे को अवैध बताया. कोर्ट ने कहा कि जमीन पर लंबे समय तक बिना पैसे दिए कब्जा रखने से कोई भी व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता. सेलिब्रिटी होने का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए. सेलिब्रिटी समाज के लिए रोल मॉडल होते हैं. लोग उनके व्यवहार को देखते हैं. इसलिए सिर्फ मशहूर होने की वजह से उन्हें कानून में कोई ढील नहीं दी जा सकती. इससे समाज में गलत संदेश जाएगा.

सरकार ने आवंटन को कर दिया था रद्द

इससे पहले पठान ने सिंगल जज के समक्ष राज्य सरकार के 6 जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें वडोदरा नगर निगम द्वारा पठान को 978 वर्ग मीटर जमीन बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के 99 साल के लिए पट्टे पर दी जा रही थी. सरकार ने आदेश जारी कर इस जमीन आवंटन को रद्द कर दिया और नगर निगम को आदेश दिया कि उस जमीन पर जो भी अवैध कब्जा है, उसे तुरंत हटाया जाए.

सरकार के इसी फैसले के खिलाफ पठान हाई कोर्ट के सिंगल जज के पास पहुंचे थे. पठान ने 2012 में वडोदरा नगर निगम से एक सरकारी जमीन अपने नाम करने की मांग की थी. नगर निगम बिना कोई नीलामी किए मार्केट प्राइस पर वह जमीन पठान को देने पर विचार कर रहा था.

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