
गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर समुद्र के बीच स्थित है। ज्वार आने पर मंदिर पानी में डूब जाता है और ज्वार उतरने के बाद फिर दिखाई देता है। भक्त इसे भगवान शिव की अद्भुत लीला मानते हैं।
गुजरात का निष्कलंक महादेव मंदिर भी बेहद खास है। समुद्र की लहरें यहां शिवलिंग का अभिषेक करती हैं और ज्वार के समय पूरा मंदिर पानी में डूब जाता है। मान्यता है कि महाभारत के बाद पांडवों ने यहां शिव की आराधना की थी।
राजस्थान के धौलपुर स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी मान्यता तो और भी रहस्यमयी है। कहा जाता है कि यहां शिवलिंग का रंग दिन में अलग-अलग समय पर बदलता दिखाई देता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई का पता लगाने की कई कोशिशों के बावजूद रहस्य बना हुआ है।
छत्तीसगढ़ का लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां मौजूद शिवलिंग में हजारों छोटे-छोटे छिद्र बताए जाते हैं। मान्यता है कि इनमें से एक छिद्र का संबंध पाताल लोक से है और उसमें चढ़ाया गया जल दिखाई नहीं देता।
हिमाचल प्रदेश का बिजली महादेव मंदिर सबसे अनोखे शिव धामों में गिना जाता है। मान्यता है कि करीब 12 साल में एक बार यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने से शिवलिंग खंडित हो जाता है और फिर पुजारी मक्खन की मदद से उसके टुकड़ों को जोड़ते हैं।
इन मंदिरों से जुड़ी कई बातें धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित हैं। यही रहस्य और आस्था इन शिव धामों को भक्तों के लिए खास बनाती है।



