
अक्सर घर में बर्तन हल्के-फुल्के चटक जाते हैं और हम उन्हें यह सोचकर इस्तेमाल करते रहते हैं कि अभी तो काम चल रहा है। लेकिन वास्तु शास्त्र में बर्तनों की स्थिति को भी घर की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा गया है। खासकर टूटे या चटके हुए बर्तनों में खाना खाने को शुभ नहीं माना जाता है।
वास्तु शास्त्र
वास्तु के अनुसार, खराब बर्तन में खाना खाने से राहु का प्रभाव बढ़ सकता है और घर में तनाव से लेकर आर्थिक परेशानियों तक की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि ऐसे बर्तनों को लेकर वास्तु में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं, टूटे बर्तनों में खाना खाने से क्या नुकसान बताए गए हैं।
टूटे बर्तनों में खाना क्यों नहीं चाहिए?
वास्तु शास्त्र में घर की चीजों को व्यवस्थित और सही स्थिति में रखने पर जोर दिया जाता है। इसी वजह से टूटे या चटके हुए बर्तनों का इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना जाता है। भोजन को अन्न और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इसे खंडित बर्तन में परोसना भी उचित नहीं माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे बर्तनों में भोजन करने से घर का सकारात्मक माहौल प्रभावित होता है। यही कारण है कि बर्तन में दरार या टूट-फूट दिखाई दे, तो उसे रोजमर्रा के इस्तेमाल से हटा देना बेहतर माना जाता है।
टूटे बर्तनों का राहु से क्या संबंध है?
वास्तु के अनुसार, घर की टूटी-फूटी चीजों का संबंध राहु से जोड़ा जाता है। राहु को भ्रम, तनाव और नकारात्मकता से जुड़ा ग्रह माना जाता है। कहा जाता है कि घर में लगातार खंडित चीजें पड़ी रहने से राहु का प्रभाव बढ़ सकता है। ऐसे में परिवार के सदस्यों के बीच बिना वजह बहस, मनमुटाव या बेचैनी की स्थिति बनने की मान्यता है। इसी कारण टूटे हुए बर्तन को संभालकर रखने के बजाय समय रहते घर से बाहर करने की सलाह दी जाती है।
क्या टूटे बर्तन से घर में आती है दरिद्रता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी का संबंध स्वच्छता, सुंदरता और व्यवस्थित घर से है। वहीं टूटे-फूटे और खंडित सामान को शुभ नहीं माना जाता है। इसी वजह से चटके या टूटे बर्तनों को दरिद्रता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ऐसे सामान के घर में बने रहने से मां लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं और अलक्ष्मी का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन साफ और सही स्थिति में रखने की परंपरा है, खासकर भोजन परोसने वाले बर्तनों को लेकर ज्यादा सावधानी बरती जाती है।
रसोई में टूटे बर्तन रखना क्यों ठीक नहीं?
घर की रसोई को वास्तु में बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। यहीं भोजन तैयार होता है और पूरे परिवार के लिए अन्न बनता है। ऐसे में रसोई में टूटे, चटके या बेकार बर्तनों का ढेर लगाकर रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि इससे रसोई की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। खासकर जिस बर्तन में खाना बनाया या परोसा जाता है, उसमें दरार हो, तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। रसोई को साफ और व्यवस्थित रखने से घर का वातावरण भी बेहतर बना रहता है।
चटके बर्तन में भोजन करने से क्या असर होता है?
वास्तु की मान्यता है कि खंडित बर्तन में भोजन करने से व्यक्ति के मन और घर के वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कहा जाता है कि इससे तनाव बढ़ता है और छोटी-छोटी बातों पर परिवार में विवाद होने लगते हैं। कई बार बनते हुए काम में रुकावट आने को भी इससे जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये बातें वास्तु और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। फिर भी भोजन के लिए साफ और सही हालत वाले बर्तन इस्तेमाल करना अच्छी आदत है और इससे भोजन करने का अनुभव भी बेहतर रहता है।
टूटे बर्तन दिखें तो क्या करना चाहिए?
अगर घर में कोई प्लेट, गिलास, कप या कटोरी टूट गई है या उसमें गहरी दरार आ गई है, तो उसे अलग कर देना चाहिए। ऐसे बर्तनों को अलमारी में दूसरे अच्छे बर्तनों के साथ रखने से भी बचना बेहतर माना जाता है। वास्तु के अनुसार, खंडित चीजों को लंबे समय तक घर में रखना शुभ नहीं होता है। इसलिए टूटे बर्तन को इस्तेमाल करने के बजाय उसे हटाना चाहिए। इससे घर में बेकार सामान जमा नहीं होगा और रसोई भी साफ-सुथरी बनी रहेगी।
घर की दूसरी चीजों पर भी दें ध्यान
वास्तु में टूटे हुए बर्तन की तरह घर की दूसरी खंडित चीजों को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए। टूटा शीशा, खराब सजावटी सामान या लंबे समय से बेकार पड़ा सामान घर में जगह घेरता है और वातावरण को अस्त-व्यस्त बनाता है। धार्मिक मान्यताओं में भी ऐसी चीजों को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए समय-समय पर घर की चीजों को देखते रहें और जो सामान इस्तेमाल के लायक नहीं है, उसे हटा दें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।



