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कॉर्पोरेट टॉर्चर की​​​​​​ हद! टारगेट पूरा न होने पर​​​​​ महिला को दी 200 उठक-बैठक की सजा, हो गई जानलेवा बीमारी.

कॉर्पोरेट टॉर्चर की​​​​​​ हद! टारगेट पूरा न होने पर​​​​​ महिला को दी 200 उठक-बैठक की सजा, हो गई जानलेवा बीमारी.

आजकल कंपनियों में काम का दबाव इस हद तक बढ़ गया है कि इंसान की जान और उसकी गरिमा की कोई कीमत ही नहीं बची है. चीन के हांगझोऊ शहर से एक बेहद डरावनी खबर सामने आई है, जो यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या कॉर्पोरेट दफ्तर अब काम की जगह हैं या टॉर्चर कैंप?

पहली नौकरी और उम्मीदें

यांग नाम की एक लड़की ने जून में हांगझोऊ की एक कंपनी में टेली-सेल्स का काम शुरू किया था. नई नौकरी को लेकर वह बहुत खुश और उत्साहित थी, लेकिन उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह नौकरी उसकी जिंदगी का सबसे बुरा सपना बन जाएगी.

200 स्क्वैट्स या जुर्माना!

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अपना डेली टारगेट पूरा नहीं कर पाई. इसके बाद उसके मैनेजर ने उसे एक ऐसा फरमान सुनाया, जिसे सुनकर किसी का भी खून खौल उठे. मैनेजर ने कहा कि टारगेट पूरा न होने पर या तो 50 युआन का जुर्माना भरो या फिर 200 उठक-बैठक करो. यांग आर्थिक रूप से कमजोर थी और उसके पास जुर्माना भरने के पैसे नहीं थे. मजबूरी में उसने ऑफिस में ही रोते-बिलखते हुए 200 स्क्वैट्स किए और सबूत के तौर पर मैनेजर को वीडियो भेजा.

जानलेवा बीमारी की चपेट में

इतनी भारी कसरत के बाद यांग के पैरों की हालत खराब हो गई और वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. उसने 5 दिन तक चुपचाप दर्द सहा, लेकिन जब उसके पेशाब का रंग काला-भूरा होने लगा, तो वह डरकर अस्पताल भागी.

डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वह रैबडोमायोलिसिस (Rhabdomyolysis) नाम की खतरनाक बीमारी की शिकार हो चुकी है. ज्यादा दबाव की वजह से उसकी मांसपेशियां अंदर से टूटने लगी थीं और उनका जहरीला कचरा खून में मिल गया था. गनीमत रही कि समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई, वरना उसकी किडनी फेल भी हो सकती थी.

कंपनी की बेशर्मी

तबीयत बिगड़ने के बाद यांग ने 30 जुलाई को नौकरी छोड़ दी. इलाज का खर्च और मुआवजे के तौर पर जब उसने कंपनी से 15,000 युआन मांगे, तो मैनेजर ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया और उल्टा कोर्ट जाने की धमकी दी. अब यांग ने हिम्मत जुटाकर श्रम विभाग और मीडिया का दरवाजा खटखटाया है. चीन के कानून के मुताबिक कर्मचारियों को शारीरिक सजा देना गैर-कानूनी है

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