हमारा इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र शरीर को बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक तत्वों से बचाने का काम करता है. लेकिन कुछ स्थितियों में यही प्रतिरक्षा तंत्र गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करने लगता है. इसे ऑटोइम्यून बीमारी कहा जाता है. रूमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस और टाइप1 डायबिटीज जैसी बीमारियां इसके उदाहरण हैं. ऐसे में शरीर में दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

रूटीन में कई ऐसी नॉर्मल हेल्थ प्रॉब्लम होती हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. पर क्या आप जानते हैं इनमें से कुछ ऑटोइम्यून कंडीशन से जुड़ी हो सकती हैं. चलिए आपको बताते हैं…
लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
डॉ. एम.के. सिंह कहते हैं कि अगर पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद लगातार थकान बनी रहती है, तो यह शरीर में किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में प्रतिरक्षा तंत्र की असामान्य गतिविधि और सूजन के कारण व्यक्ति को अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है. हालांकि, थकान के पीछे एनीमिया, नींद की कमी और थायराइड जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
जोड़ों में दर्द और सूजन
जोड़ों में लगातार दर्द, अकड़न या सूजन होना ऑटोइम्यून बीमारियों का एक संभावित संकेत है. रूमेटाइड अर्थराइटिस में प्रतिरक्षा तंत्र जोड़ों की अंदरूनी परत पर हमला करता है, जिससे दर्द और सूजन हो सकती है. सुबह उठने पर जोड़ों में लंबे समय तक अकड़न महसूस होना भी इस बीमारी में देखा जा सकता है.
त्वचा पर बारबार रैशेज होना
त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या असामान्य बदलाव कुछ ऑटोइम्यून स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, ल्यूपस में चेहरे पर तितली जैसा रैशेज दिखाई दे सकता है. हालांकि, हर तरह के स्किन चेंज को ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत नहीं माना जा सकता. एलर्जी और त्वचा संक्रमण भी इसके सामान्य कारण हैं.
पाचन संबंधी समस्याएं होना
बारबार पेट दर्द, दस्त, पेट फूलना या पाचन में परेशानी होना भी कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़ा हो सकता है. उदाहरण के लिए, सीलिएक बीमारी में ग्लूटेन के सेवन से प्रतिरक्षा तंत्र छोटी आंत को नुकसान पहुंचाता है. वहीं, क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियों में पाचन तंत्र में सूजन हो सकती है.
बारबार सूजन या असामान्य शारीरिक बदलाव
शरीर के अलगअलग हिस्सों में लगातार सूजन, मांसपेशियों में दर्द या बिना स्पष्ट कारण बुखार आना कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में देखा जा सकता है. इसके अलावा, कुछ लोगों को बाल झड़ने, मुंह में बारबार छाले होने या धूप के प्रति त्वचा की सेंसिटिविटीबढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इन लक्षणों का महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितने समय से हैं और उनके साथ अन्य परेशानियां भी मौजूद हैं या नहीं.
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर ऊपर बताए गए लक्षण लगातार बने रहते हैं, बारबार दिखाई देते हैं या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. विशेषज्ञ व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट या अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं.



