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​नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत! EPF लिमिट ₹25,000 होने पर कंपनियों को सरकार का कड़ा संदेश- ‘सैलरी में न हो कटौती’

केंद्र सरकार ने देश की सभी कंपनियों और इंप्लॉयर्स को एक सख्त एडवाइजरी जारी की है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह किए जाने के बाद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी नए नियम का हवाला देकर कर्मचारियों की टेकहोम सैलरी में कटौती नहीं कर सकती. इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य यह है कि पीएफ दायरे के विस्तार का वास्तविक लाभ कर्मचारियों को मिले और उनके मासिक बजट पर कोई नेगेटिव असर न पड़े. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से किस तर​ह के निर्देश दिए हैं.

​नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत! EPF लिमिट ₹25,000 होने पर कंपनियों को सरकार का कड़ा संदेश- ‘सैलरी में न हो कटौती’

सरकार के कंपनी को निर्देश

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इंप्लॉयर्स को निर्देश दिया है कि EPFO ​​के तहत 25,000 रुपए की बढ़ी हुई सैलरी लिमिट लागू होने के बाद कर्मचारियों की टेक होम सैलरी बिल्कुल भी कम नहीं होनी चाहिए. इस कदम का मकसद उन आशंकाओं को दूर करना है कि बढ़ी हुई सैलरी लिमिट के तहत इंप्लॉयर का हिस्सा कर्मचारियों की ‘कॉस्टटूकंपनी’ से एडजस्ट किया जा सकता है. सरकार ने 17 सितंबर को EPFO ​​के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दिया था, ताकि 1 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज के दायरे में लाया जा सके और वर्कफोर्स को और ज्यादा फॉर्मल बनाया जा सके. मंत्रालय ने सुझाव दिया कि इंप्लॉयर सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन में अपने हिस्से को बेहतर ह्यूमन रिसोर्स प्रैक्टिस को बढ़ावा देने, कर्मचारियों की संतुष्टि और उन्हें बनाए रखने के तरीके के तौर पर देखें.

इंप्लॉयर्स की कॉस्ट में अनुमानित बढ़ोतरी होगी

मंत्रालय ने कहा कि इंप्लॉयर के कानूनी योगदान को सिर्फ ‘कॉस्टटूकंपनी’ का हिस्सा बताकर कर्मचारी की कटौती के तौर पर नहीं देखा जा सकता. साथ ही इंप्लॉयर का कंट्रीब्यूशन का कंट्रीब्यूशन सही ढंग से हो साथ ही कानून के उलट कर्मचारियों का कानूनी वेतन कम न किया जाए. इस बारे में जारी FAQs में मंत्रालय ने माना कि इंप्लॉयर्स की कॉस्ट में अनुमानित बढ़ोतरी होगी. मंत्रालय ने कहा कि इंप्लॉयर ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ के तहत हर अतिरिक्त रोजगार के लिए 3,000 रुपए प्रति माह तक के प्रोत्साहन से इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ की कुछ हद तक भरपाई कर सकते हैं. साथ ही, वर्कफोर्स को औपचारिक बनाने से निवेश के ठिकाने के तौर पर भारत की छवि भी बेहतर होती है.

तत्काल शुरू करना होगा ये काम

मंत्रालय ने इंप्लॉयर्स को प्रभावित कर्मचारियों की समीक्षा शुरू करने और अगले पेरोल साइकिल का इंतजार न करने का निर्देश दिया. मंत्रालय ने कहा, “तत्काल प्राथमिकता पहचानना, हिसाब लगाना, एनरोल करना, रिपोर्ट करना, रकम जमा करना और मिलान करना होनी चाहिए. इसमें यह भी साफ किया गया कि 15,000 रुपए ज्यादा और 25,000 रुपए से कम सैलरी वाले सभी योग्य कर्मचारियों के लिए ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम’ का मेंबर बनना ज़रूरी होगा. कर्मचारी का जरूरी 12 फीसदी योगदान पूरी तरह से EPF में जाएगा, जबकि इंप्लॉयर का 12 फीसदी योगदान दो हिस्सों में बंटेगा. जिसमें एक हिस्सा 8.33 फीसदी EPS में जाएगा और बाकी हिस्सा EPF में जाएगा.

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