
सूरत की खौफनाक वारदात: बेरोजगारी, हीनभावना और शक ने पति के मन में ऐसा जहर घोला कि जिस पत्नी के साथ 16 साल बिताए, उसी की जान ले ली; अंत में 13 साल के बेटे को लिखे पत्र से खुला पूरा राज
सूरत की उस शाम को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि कुछ ही घंटों बाद एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखरने वाला है। घर में दो बच्चे थे, मां शिल्पा अपने काम और परिवार को संभाल रही थी और पिता विशाल सालवी भी कभी नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाता था। लेकिन बेरोजगारी ने धीरे-धीरे उसके भीतर ऐसी हीनभावना और शक पैदा कर दिया, जिसने आखिरकार एक दिन उसे अपनी ही पत्नी का हत्यारा बना दिया।
यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस शक की है जिसने पहले पति-पत्नी के रिश्ते को तोड़ा और फिर दो मासूम बच्चों से उनकी मां और पिता दोनों छीन लिए।
शादी के बाद जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी
सूरत के विशाल सालवी और शिल्पा की शादी साल 2010 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों की जिंदगी सामान्य और खुशहाल रही। शिल्पा एक निजी अस्पताल में डायटिशियन के तौर पर काम करती थी और अपना क्लीनिक भी चलाती थी। विशाल एक हीरा फर्म में नौकरी करता था।
समय के साथ परिवार बढ़ा और दोनों दो बच्चों के माता-पिता बने। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक नजर आता था।
लेकिन वक्त के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं।
नौकरी छूटने के बाद बदलने लगा विशाल
कुछ समय बाद विशाल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक उसे कोई स्थायी काम नहीं मिला। घर का खर्च और बच्चों की जिम्मेदारी धीरे-धीरे शिल्पा के कंधों पर आ गई।
शिल्पा चाहती थी कि विशाल दोबारा काम शुरू करे। वह जब भी उसे नौकरी तलाशने के लिए कहती, दोनों के बीच बहस हो जाती।
बेरोजगारी और आर्थिक तनाव ने विशाल के स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ा दिया। वह घर में ज्यादा समय बिताने लगा। इसी दौरान उसके मन में एक और चीज ने जगह बना ली—पत्नी के चरित्र को लेकर शक।
कोई सबूत नहीं था, फिर भी शक बढ़ता गया
विशाल को लगने लगा कि शिल्पा का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध है। शिल्पा ने इन आरोपों को नकार दिया, लेकिन विशाल का शक कम नहीं हुआ।
बताया जाता है कि दोस्तों और आसपास के लोगों की बातें भी उसके मन पर असर डाल रही थीं। अपनी बेरोजगारी और असफलता से पैदा हुई हीनभावना धीरे-धीरे पत्नी के प्रति अविश्वास में बदलती चली गई।
शिल्पा के लिए पति के ऐसे आरोप बेहद परेशान करने वाले थे। लेकिन उसे शायद यह अंदाजा नहीं था कि यही शक एक दिन उसकी जान ले लेगा।
20 अप्रैल की वह दोपहर
20 अप्रैल 2026 को विशाल ने शिल्पा से कहा कि पुराने पुश्तैनी मकान से कुछ सामान लाना है। शिल्पा उसके साथ सलाबतपुरा स्थित उस मकान में चली गई।
उसे शायद लगा होगा कि रोज की तरह यह भी एक सामान्य काम है।
लेकिन उस पुराने मकान में उस दिन जो हुआ, उसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
वहां दोनों के बीच फिर पत्नी के कथित अवैध संबंधों को लेकर बहस शुरू हो गई। शिल्पा ने आरोपों को खारिज किया। बहस बढ़ती चली गई और गुस्से में विशाल ने कथित तौर पर उसका गला दबा दिया।
कुछ ही देर में शिल्पा की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।
हत्या के बाद शव को बक्से में छिपाया
हत्या के बाद विशाल घबराया जरूर होगा, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
उसने शिल्पा के शव को लकड़ी के एक बड़े बक्से में रख दिया। इसके बाद बक्से पर सीमेंट की मोटी परत चढ़ा दी, ताकि शव बाहर से दिखाई न दे और बदबू भी कम हो।
जिस घर में कभी परिवार का सामान रखा जाता था, उसी मकान में अब एक ऐसा राज दफन था, जिसका पता किसी को नहीं था।
घर लौटकर ऐसे पेश आया जैसे कुछ हुआ ही नहीं
हत्या के बाद विशाल ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। वह रिश्तेदारों के घर गया और फिर अपने घर लौट आया।
परिवार और बच्चों के सामने उसने दावा किया कि वह शिल्पा को अस्पताल के पास छोड़कर आया था।
घरवालों को उस समय शायद उसके चेहरे पर छिपे डर का अंदाजा भी नहीं हुआ।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।
अगले दिन खुद थाने पहुंचा
अगले दिन विशाल अपने ससुर प्रदीप कोस्टा के साथ थाने पहुंचा और शिल्पा की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद उसने करीब पांच दिनों तक पत्नी को खोजने का दिखावा किया। वह ऐसा व्यवहार करता रहा जैसे उसे सचमुच अपनी पत्नी के गायब होने की चिंता हो।
लेकिन पुलिस के अनुसार, इसी दौरान वह चोरी-छिपे पुराने मकान में जाता था।
उसे डर था कि कहीं शव से आने वाली बदबू किसी को शक न करा दे। इसलिए वह वहां जाकर कथित तौर पर बक्से से निकल रहे तरल पदार्थ को साफ करता और कमरे में रूम फ्रेशनर छिड़कता था।
हर बार वह यही कोशिश करता कि उस घर के अंदर छिपा सच बाहर न आए।
पांचवें दिन खुद ही टूट गया
लगातार पांच दिनों तक यह सब करने के बाद शायद विशाल को एहसास होने लगा कि अब वह ज्यादा समय तक पुलिस से नहीं बच पाएगा।
फिर उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी वारदात का पर्दाफाश कर दिया।
उसने अपने 13 साल के बेटे को एक हस्तलिखित पत्र दिया।
पत्र में उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और यह भी लिखा कि शव कहां और किस तरह छिपाया गया है।
बेटे के हाथ में पहुंचा वह कागज दरअसल उस खौफनाक राज की चाबी बन चुका था, जिसे विशाल पांच दिनों से छिपाने की कोशिश कर रहा था।
सीमेंट के नीचे मिला मां का शव
पत्र मिलने के बाद पुलिस पुराने मकान तक पहुंची। वहां जांच शुरू हुई तो सीमेंट से ढका लकड़ी का बक्सा मिला।
बक्से को खोला गया तो अंदर शिल्पा का सड़ चुका शव बरामद हुआ।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच में मोबाइल लोकेशन समेत अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया और आखिरकार विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में उसने कथित तौर पर पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और पुलिस को बताया कि पत्नी के चरित्र पर शक तथा अपनी मानसिक कुंठा के कारण उसने यह कदम उठाया।
एक शक ने दो बच्चों का पूरा संसार उजाड़ दिया
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि शिल्पा के दो मासूम बच्चे देखते ही देखते अपनी मां और पिता दोनों से दूर हो गए।
जिस मां के साथ वे रोज की जिंदगी जीते थे, उसकी हत्या हो चुकी थी। और जिस पिता को वे अपना सहारा समझते थे, वह अब जेल पहुंच चुका था।
आखिरकार बच्चों के नाना प्रदीप कोस्टा उन्हें अपने साथ ले गए।
एक परिवार जो कभी पति-पत्नी और दो बच्चों के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा था, वह कुछ ही दिनों में पूरी तरह बिखर गया।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि बिना किसी ठोस आधार का शक जब जुनून बन जाता है, तो वह सिर्फ रिश्ते नहीं तोड़ता—कभी-कभी पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर देता है।
नोट: यह कहानी उपलब्ध घटनाक्रम और पुलिस जांच में सामने आए कथित तथ्यों पर आधारित पुनर्लेखन है। किसी आरोपी का दोष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही कानूनी रूप से सिद्ध माना जाएगा।



