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भारत: अभिजीत दीपके: और अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के बीच जुबानी जंग तेज, अमेरिकी डोनर्स को लेकर फिर छिड़ा विवाद

भारत: अभिजीत दीपके: और अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के बीच जुबानी जंग तेज, अमेरिकी डोनर्स को लेकर फिर छिड़ा विवाद

भारत: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के बीच अमेरिकी फंडिंग को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। मिलबेन ने दीपके को जवाब देते हुए कहा है कि यदि वह अपने मकसद में सफल नहीं हुए, तो उन्हें समर्थन देने वाले अमेरिकी दानदाता उनका साथ छोड़ सकते हैं। इससे पहले भी मिलबेन ने दावा किया था कि दीपके और उनकी पार्टी को अमेरिका से आर्थिक मदद मिल रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

इस मुद्दे पर अभिजीत दीपके ने विदेशी नागरिकों के भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने पर सवाल उठाए थे। वहीं, मिलबेन के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अब यह विवाद राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके को क्या कहा?

मिलबेन ने सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह सफल नहीं होते हैं, तो अमेरिकी डोनर उनका साथ छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अराजकता के जरिए सफलता हासिल नहीं की जा सकती।

अपने संदेश में मिलबेन ने दीपके को अमेरिकी शिक्षा पूरी करने और उसका इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों में करने की सलाह दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर भारत के विकास पर चर्चा करने की बात भी कही।

मिलबेन के बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि भारत के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों का समाधान देश के भीतर ही निकाला जाना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी डोनर्स की ओर से कथित फंडिंग को लेकर उनके दावे की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।

2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी की टिप्पणी

मैरी मिलबेन ने अपने बयान में 2029 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश में व्यापक जनसमर्थन मिलने की बात कही और दावा किया कि भाजपा आगामी चुनाव में भी जीत हासिल करेगी।

यह मिलबेन का राजनीतिक आकलन और दावा है। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव का परिणाम अभी भविष्य की बात है और इसका अनुमान मौजूदा बयान के आधार पर निश्चित रूप से नहीं लगाया जा सकता।

अभिजीत दीपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

इससे पहले अभिजीत दीपके ने अमेरिकी सिंगर के कथित फंडिंग संबंधी दावे पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने सवाल किया था कि भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों को हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया है।

दीपके का कहना था कि भारत अपने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को खुद सुलझाने में सक्षम है और इसके लिए बाहरी लोगों के समर्थन की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

इस तरह दोनों पक्षों के बीच विवाद केवल आर्थिक मदद के दावे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भारत की राजनीति में विदेशी भूमिका और बाहरी समर्थन को लेकर भी बहस शामिल हो गई है।

अमेरिकी फंडिंग को लेकर पहले भी लगाए गए थे आरोप

मिलबेन ने इससे पहले दावा किया था कि अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी को ऐसे अमेरिकी दानदाताओं से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ विदेशी समर्थक अमेरिका में पढ़े युवाओं को प्रभावित करके अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, ये आरोप हैं और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। कथित फंडिंग की रकम, उसके स्रोत और धन के इस्तेमाल से जुड़े प्रमाणों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।

भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

मिलबेन के दावों पर भाजपा के तेलंगाना प्रमुख एन. रामचंद्र राव ने समर्थन जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी धन का इस्तेमाल भारत में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने अपने बयान में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए शाहीन बाग आंदोलन का भी उल्लेख किया।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने मिलबेन के दावों पर सवाल उठाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने इसे भाजपा की पुरानी राजनीतिक रणनीति बताया और सरकार पर निशाना साधा।

इस प्रकार, अमेरिकी फंडिंग के आरोपों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी को भी तेज कर दिया है। लेकिन किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले संबंधित तथ्यों और प्रमाणों की जांच आवश्यक है।

क्या है पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा?

इस विवाद के तीन प्रमुख पहलू हैं—कॉकरोच जनता पार्टी को कथित अमेरिकी फंडिंग, भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका और इन आरोपों पर भाजपा-कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।

फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में अमेरिकी फंडिंग के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के बजाय संबंधित पक्षों के आरोप और बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। कथित विदेशी फंडिंग और राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाठकों को आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर ध्यान में रखना चाहिए।

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