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मुंबई मेट्रो में ‘पीकदान’ देखकर चौंके लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मुंबई मेट्रो में ‘पीकदान’ देखकर चौंके लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मुंबई मेट्रो की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर मेट्रो स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्रियों की सुविधा से जुड़ी चीजें दिखाई देती हैं, लेकिन वायरल तस्वीर में एक ऐसी व्यवस्था नजर आई, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

तस्वीर में थूकने के लिए एक खास ‘स्पिट बिन’ यानी थूकदान लगा दिखाई दे रहा है। इसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच बहस शुरू हो गई कि आखिर मेट्रो स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगह पर इस तरह की सुविधा की जरूरत क्यों पड़ी।

तस्वीर में क्या नजर आ रहा है?

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीर मुंबई मेट्रो के एक स्टेशन की बताई जा रही है। इसमें एक टचलेस स्पिट बिन दिखाई देता है। यानी इसे इस्तेमाल करने के लिए हाथ से किसी हिस्से को छूने की जरूरत नहीं पड़ती।

इसके साथ लगे बोर्ड पर मुंबई मेट्रो से संबंधित लोगो और ‘Be Responsible’ संदेश दिखाई देता है। तस्वीर में इस व्यवस्था को ‘World’s First Defined Place to Spit’ के तौर पर भी पेश किया गया है।

रिपोर्टों में इस तस्वीर को गुंडावली मेट्रो स्टेशन से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, वायरल पोस्ट के आधार पर तस्वीर की पूरी परिस्थितियों और मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं की गई है।

किस कंपनी ने बनाया है यह स्पिट बिन?

वायरल खबरों के मुताबिक, इस तरह के स्पिट बिन को EzySpit नाम की कंपनी ने तैयार किया है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर खुले में थूकने से होने वाली गंदगी को कम करना और थूक के सीधे संपर्क में आने की संभावना घटाना है।

इस व्यवस्था में थूक को एक निर्धारित और बंद सिस्टम में रखने का विचार है, ताकि लोग सार्वजनिक स्थान के फर्श, दीवार या दूसरी जगहों पर न थूकें।

जब थूकना मना है तो फिर ऐसी सुविधा क्यों?

यही सवाल इस तस्वीर के वायरल होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में है।

लोगों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि अगर मेट्रो परिसर में थूकना नियमों के खिलाफ है, तो फिर थूकने के लिए अलग डिब्बा लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी आदत के कारण थूकता ही है, तो कम से कम उसे एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने से स्टेशन के दूसरे हिस्सों में गंदगी फैलने से रोका जा सकता है।

यानी इस व्यवस्था को लेकर बहस केवल ‘पीकदान’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि सार्वजनिक स्वच्छता के लिए व्यवहार बदलना ज्यादा जरूरी है या व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना।

सोशल मीडिया पर दो तरह की राय

तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आईं।

कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक कदम बताया। उनका कहना है कि अगर किसी सार्वजनिक स्थान

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