
अमृत विचार, लखनऊ: इंडिया एक्सपो मार्ट का नजारा आज कुछ अलग ही था। मौका था ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026’ के आगाज का, लेकिन माहौल किसी भव्य सांस्कृतिक जलसे से कम नहीं लग रहा था। एक तरफ जहाजों और गाड़ियों के सौदों की सरगर्मी थी, तो दूसरी तरफ यूपी की माटी की खुशबू और लोक कला का ऐसा जादू चला कि हर कोई बस देखता रह गया।
थाप ढोल की, झंकार घुंघरू की: लोक कलाकारों ने लूटी महफिल
दिन ढलतेढलते एक्सपो मार्ट का पूरा गलियारा अवध, ब्रज और बुंदेलखंड के लोक रंगों में रंग चुका था। ब्रज से आए कलाकारों ने जब सिर पर जलते दीपों का चरकुला संभालते हुए कदम थिरकाए, तो पूरा हॉल तालियों की गूंज से सराबोर हो उठा। मयूर नृत्य की चपलता और अवधी लोक गायन की मिठास ने देसीविदेशी मेहमानों को अपनी जगह ठिठकने पर मजबूर कर दिया।
रैम्प पर उतरी नजाकत: जब सिल्क और चिकनकारी ने बिखेरा जलवा
शाम होते ही सांस्कृतिक फैशन शो ने समां बांध दिया। बनारस की शाही रेशमी साड़ियों, लखनऊ की बारीक चिकनकारी और राज्य के चुनिंदा हस्तशिल्प को पहनकर जब मॉडल्स ने रैंप पर कदम रखे, तो लगा जैसे यूपी की सदियों पुरानी विरासत आज के दौर से बतिया रही हो। परंपरा और आधुनिकता का यह संगम आज के दिन का सबसे बड़ा आकर्षण बना।
रोशनी का खेल और माटी का जादू
रात के अंधेरे को चीरती हुई सतरंगी लेजर लाइटों ने जब एक्सपो मार्ट के गुंबद को छुआ, तो उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास की तस्वीरें जगमगा उठीं। वहीं दूसरी ओर, एक कोने में बैठे कुम्हार की चाक पर ढलती मिट्टी और पीतल के कारीगरों की छैनीहथौड़ी की थाप यह बता रही थी कि यह ट्रेड फेयर सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि इस सूबे की आत्मा और हुनर का सच्चा उत्सव है।
पहले ही दिन जिस तरह कला और संस्कृति की बयार बही है, उसने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह ट्रेड शो हर दिल पर अपनी गहरी छाप छोड़ने वाला है।
रिपोर्ट : दरख्शां कदीर सिद्दीकी
यह भी पढे :



