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​रूसी सेना में कैसे भर्ती हुए भारतीय जवान? इन्हें वापस लाने की कोशिश तेज

रूसी सेना में मौजूद भारतीय इन दिनों चर्चा में हैं. लोग समझना चाहते हैं कि आखिर यह सिलसिला शुरू कब हुआ? भारतीय जवान रूसी सेना में भर्ती कैसे हुए? अगर भर्ती हो गए हैं तो वापसी की बात क्यों हो रही है? भारत सरकार को बीचबचाव करके उन्हें वापस क्यों लाना पड़ रहा है. अभी भी रूसी सेना के साथ काम कर रहे 55 भारतीय नौजवानों का उनके परिजन इंतजार क्यों कर रहे हैं? आइए, समझते हैं आखिर यह पूरा मामला क्या है? और पेंच कहां है?

​रूसी सेना में कैसे भर्ती हुए भारतीय जवान? इन्हें वापस लाने की कोशिश तेज

असल में यह पूरा मामला बेहद पेचीदा है. एजेंट्स ने धोखाधड़ी करके ऐसे युवाओं को नौकरी के नाम पर वहां भेजा है. रूस में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत भारतीयों को सेना में शामिल किया जाए. एजेंट्स के जरिए रोजगार की तलाश में पहुंचे भारतीय युवाओं को यूक्रेन युद्ध के समय सेना में भर्ती करवा दिया गया. क्योंकि उस समय रूसी सेना को बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत थी. रूसयूक्रेन युद्ध चरम पर था.

ऐसे भारतीयों की संख्या लगभग 227 बताई गई है. अकेले भारत के नागरिक रूसी सेना में नहीं शामिल हुए. दुनिया के कई देशों के नागरिकों के साथ ऐसा हुआ. शोरशराबे के बीच उनकी वापसी हुई. भारत के भी करीब 140 लोग वापस या चुके हैं. 55 के अभी और लौटने की कोशिशें जारी हैं. भारत सरकार के मुताबिक 51 भारतीय नागरिक लापता हैं. आशंका है कि वे युद्ध में मारे गए.

रूसी सेना में भर्ती का यह सिलसिला कब शुरू हुआ?

भारतीयों को रूसी सेना में शामिल करने की खबरें 2023 के आखिर से सामने आने लगीं. 2024 की शुरुआत में यह मुद्दा भारत में ज्यादा चर्चा में आया. तब कई परिवारों ने बताया कि उनके परिवारी जन रूस में फंस गए हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. असल में कुछ भारतीय रूस में काम की तलाश में गए थे. उन्हें निर्माण कार्य, सुरक्षा या दूसरी सामान्य नौकरियों का प्रस्ताव दिया गया था. कुछ मामलों में पर्यटक या विद्यार्थी वीजा पर रूस जाने की बात भी सामने आई.

रूसी सेना में भारतीयों को भर्ती करने जैसी कोई व्यवस्था नहीं है.

रूस पहुंचने के बाद कुछ लोगों पर सैन्य अनुबंध करने का दबाव डाले जाने के आरोप लगे. भारत सरकार ने इस मामले को रूस के सामने उठाया. भारत ने वहां मौजूद भारतीयों की रिहाई और सुरक्षित वापसी की मांग की. रूस की ओर से 2024 में भारतीयों की भर्ती रोकने का आश्वासन दिए जाने की सूचना आईं.

रूसी सेना में भर्ती कैसे होती है?

रूसी सेना में भारतीयों को भर्ती करने जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. एजेंट्स के माध्यम से रोजगार की तलाश में जो लोग भारत से रूस पहुंचे, उन्हें सेना से जोड़ दिया गया. असल में यूक्रेन युद्ध जब तेज हुआ तो रूसी सेना को ज्यादा लोगों की जरूरत थी. ऐसे में इस तरह के लोग सहज मिलते गए. उन्हें शामिल कर लिया गया. जो 140 लोग वापस आए हैं, उनके मुताबिक हर आदमी रोजगार की तलाश में किसी न किसी एजेंट के जरिए गया था. ये एजेंट रूस में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी का प्रस्ताव देते थे.

कुछ उम्मीदवारों को कहा गया कि काम सैन्य नहीं होगा. उन्हें सहायक, रसोई, सुरक्षा या निर्माण से जुड़ा काम बताया गया. कुछ लोगों ने यह भी जानकारी दी कि रूस पहुंचने के बाद उनसे ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया जिनका मतलब वे पूरी तरह नहीं समझते थे. दस्तावेज रूसी भाषा में होने से शर्तें समझना कठिन था. कुछ मामलों में सैन्य सेवा के अनुबंध पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव डालने के आरोप भी लगे.

भारतीय सेना के जवान. फोटो: PTI

भर्ती के लिए क्यों तैयार किया जाता है?

विदेश में अच्छी कमाई और बेहतर जीवन का वादा बेरोजगार या कम आय वाले युवाओं को आकर्षित करता है. कुछ लोगों को वेतन, बोनस और भविष्य में नागरिकता मिलने जैसी बातों का लालच दिए जाने की खबरें भी आईं. इन वादों की शर्तें हर मामले में समान हों, यह प्रमाणित नहीं है. गलत जानकारी देकर भी लोगों को ले जाया गया. किसी व्यक्ति को सामान्य नौकरी का भरोसा दिया गया, जबकि बाद में उससे सैन्य सेवा का अनुबंध कराया गया. भाषा एजेंटों के झूठे दावों या दबाव के कारण भी लोग मुश्किल में पड़ते गए.

इस समय रूस में कितने भारतीय फंसे हैं?

रिहाई, वापसी, मौत और लापता होने के मामलों के कारण अलगअलग तारीखों पर अलग आंकड़े सामने आए हैं. हालिया खबरों में भारत सरकार से जुड़ी जानकारी के आधार पर कुल 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने का आंकड़ा सामने आया था. उनमें से 140 को सेवा से मुक्त कराकर भारत लौटाया गया. 51 भारतीयों की मौत की सूचना थी. इन आंकड़ों से बाकी लोगों की स्थिति का सटीक निष्कर्ष खुद से नहीं निकलता.

कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि करीब दो दर्जन लोगों अब भी सेना की सेवा में हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय की एक अन्य रिपोर्ट में 55 भारतीयों का पता लगाने या उन्हें वापस लाने की कोशिश की जा रही है. इस संदर्भ में भारत सरकार ने उच्च स्तरीय बैठकें करके लोगों की वापसी सुनिश्चित की है. जो लोग बचे हैं, वे भी बहुत जल्दी स्वदेश लौट आएंगे.

रूस से 140 भारतीयों को सेवा से मुक्त कराकर भारत लौटाया जा चुका है. फोटो: PTI

परिवारों और सरकार की चिंता क्या है?

इस मामले में परिवारों की सबसे बड़ी चिंता अपनों की सुरक्षा है. संपर्क न हो पाना है. युद्ध क्षेत्र में संचार सीमित हो सकता है. कुछ परिवारों को अपने सदस्य की स्थिति, तैनाती या वापसी की तारीख जानने में कठिनाई हुई है. भारत सरकार ने रूस से भारतीय नागरिकों को जल्द वापस करने की मांग की है. भारतीय दूतावास परिवारों और संबंधित अधिकारियों के बीच संपर्क में मदद कर रहा है. विदेश मंत्रालय इस मामले में सख्त रुख अपनाए हुए है.

नौकरी के प्रस्ताव पर क्या सावधानी रखें?

युवाओं को चाहिए कि जब भी रूस या किसी दूसरे देश में नौकरी का प्रस्ताव मिले तो एजेंट और नियोक्ता की पहचान जांचें. भर्ती एजेंट का पंजीकरण और कंपनी का पता लिखित रूप में लें. नौकरी का पूरा अनुबंध अपनी भाषा में पढ़ें. वीजा किस काम के लिए है, यह देखें. केवल मौखिक वादे पर भरोसा न करें. यह सारी चीजें देश से रवाना होने से पहले देखें. किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले स्वतंत्र अनुवाद और कानूनी सलाह लें. पासपोर्ट या मूल कागजात किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें. परिवार को यात्रा, नियोक्ता और रहने की जगह का पूरा विवरण दें. यदि नौकरी का प्रस्ताव सैन्य सेवा, हथियार, सैन्य प्रशिक्षण या युद्ध क्षेत्र से जुड़ा हो, तो उसे सामान्य विदेशी रोजगार न समझें.

इस तरह कहा जा सकता है कि रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती का मामला नौकरी के नाम पर दिए गए कथित भ्रामक प्रस्तावों, आर्थिक लालच और युद्ध के जोखिम से जुड़ा है. कुछ लोगों को सामान्य काम का भरोसा मिला, लेकिन बाद में सैन्य सेवा में जाने की बात सामने आई. कुल 227 भारतीयों की भर्ती, 140 की रिहाई और 51 मौतों के आंकड़े अक्टूबर 2026 की अलगअलग रिपोर्ट्स में बताए गए हैं.

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