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वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है 7 बार सूत? जानें सुहागिनों के लिए क्यों है यह इतना खास

Vat Savitri Vrat 2026: हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत मनाया जाता है। इस दिन शनि जयंती भी होती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर वट या बरगद पेड़ की पूजा करती हैं। वट सावित्री का व्रत करने से व्रती महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती भव: का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावित्री ने मृत्यु के देवता यमराज को अपने पति सत्यवान के प्राण को लौटाने पर विवश किया था। इसीलिए विवाहित स्त्रियां अपने पति की सकुशलता एवं दीर्घायु की कामना के लिए वट सावित्री का व्रत रखती है।  वट सावित्री व्रत के दिन दिन बरगद पेड़ की पूजा करने से यमराज देवता के साथ त्रिदेवों की भी कृपा प्राप्त होती है।

वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है 7 बार सूत? जानें सुहागिनों के लिए क्यों है यह इतना खास
वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है 7 बार सूत? जानें सुहागिनों के लिए क्यों है यह इतना खास

2026 में वट सावित्री का व्रत कब रखा जाएगा?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 16 मई को ही देर रात 1 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल वट सावित्री का व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। 

बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है 7 बार सूत? 

वट सावित्री व्रत के दिन पूजा के दौरान सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष पर सात बार कच्चा सूत लपेटती हैं। इसके बिना वट सावित्री व्रत की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत के दिन वट यानी बरगद पेड़ पर कच्चा सूत बांधने से पति पर आने वाले सभी संकट और बाधा दूर हो जाता है। इसके साथ ही दांपत्य जीवन में सुख, शांति, प्यार और मधुरता बनी रहती है। वट वृक्ष पर सात बार सूत बांधने से पतिपत्नी का साथ सात जन्मों तक बना रहता है। 

दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में महादेव का वास होता है। जब महिलाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत बांधती हैं, तो वे त्रिदेवों से अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुखसमृद्धि की प्रार्थना करती हैं। मान्यताओं के मुताबिक कच्चा सूत बांधना एक तरह से भगवान को साक्षी मानकर सुरक्षा कवच मांगने जैसा है।

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