
नई दिल्ली: आजकल की व्यस्त दिनचर्या में फिट रहने के लिए लोग कई तरह के व्यायाम और योग का सहारा लेते हैं। योग का एक सरल आसन वृक्षासन भी है, जिसे अंग्रेजी में ट्री पोज कहा जाता है। इस आसन में एक पैर पर खड़े होकर शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है। नियमित अभ्यास से संतुलन, शरीर की स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
वृक्षासन का अभ्यास करते समय पैरों, टखनों और कूल्हों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। साथ ही, किसी एक बिंदु पर नजर टिकाकर सामान्य रूप से सांस लेने से ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास होता है। हालांकि, इसके फायदे व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और अभ्यास के तरीके पर निर्भर करते हैं।
क्या है वृक्षासन और इसे करना क्यों फायदेमंद है?
वृक्षासन खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है। इसमें शरीर का वजन एक पैर पर रखा जाता है और दूसरे पैर के तलवे को खड़े पैर की पिंडली या जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखा जाता है। हाथों को छाती के सामने जोड़ सकते हैं या सहज महसूस होने पर सिर के ऊपर ले जा सकते हैं।
शुरुआत में इस आसन में संतुलन बनाना मुश्किल लग सकता है। ऐसे में दीवार या मजबूत कुर्सी का सहारा लेकर अभ्यास किया जा सकता है।
वृक्षासन करने के 5 प्रमुख फायदे
1. शरीर का संतुलन बेहतर बनाने में मदद
वृक्षासन में एक पैर पर खड़े रहने के दौरान टखनों, पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को शरीर को स्थिर रखने के लिए मिलकर काम करना पड़ता है। नियमित अभ्यास से संतुलन बनाए रखने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। यह रोजमर्रा की गतिविधियों में भी उपयोगी हो सकता है।
2. पैरों और टखनों की स्थिरता का अभ्यास
इस आसन में खड़े पैर को शरीर का भार संभालना होता है। इससे पैरों और टखनों के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। हालांकि, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए इसके साथ दूसरे उपयुक्त व्यायाम करना भी जरूरी है।
3. एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
वृक्षासन करते समय सामने किसी स्थिर बिंदु पर नजर टिकाने और सांस पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इससे ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास होता है। योग और सांस पर ध्यान देने से कुछ लोगों को मानसिक शांति महसूस करने और तनाव संभालने में भी मदद मिल सकती है।
4. शरीर की मुद्रा के प्रति जागरूकता
वृक्षासन में रीढ़ को सीधा रखने, कंधों को सहज स्थिति में रखने और कूल्हों को संतुलित रखने का प्रयास किया जाता है। इससे शरीर की मुद्रा पर ध्यान देने की आदत विकसित हो सकती है।
5. उम्र बढ़ने पर संतुलन बनाए रखने के अभ्यास में उपयोगी
उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों को खड़े होने और चलने के दौरान संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में संतुलन से जुड़े व्यायाम उपयोगी हो सकते हैं। वृक्षासन को भी अभ्यास में शामिल किया जा सकता है, लेकिन बुजुर्गों को अपनी क्षमता के अनुसार और जरूरत पड़ने पर सहारे के साथ ही इसे करना चाहिए।
वृक्षासन करने का सही तरीका
अगर आप पहली बार वृक्षासन कर रहे हैं, तो जल्दबाजी करने के बजाय आसान तरीके से शुरुआत करें।
स्टेप 1: सीधे खड़े हो जाएं
दोनों पैरों को जमीन पर टिकाकर सीधे खड़े हों। शरीर का वजन दोनों पैरों पर बराबर रखें और कंधों को आराम की स्थिति में छोड़ दें।
स्टेप 2: एक पैर को धीरे-धीरे मोड़ें
शरीर का वजन बाएं पैर पर लाएं और दाएं पैर को घुटने से मोड़ें। दाएं पैर के तलवे को बाएं पैर की पिंडली या जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें। शुरुआत में पैर की उंगलियां जमीन पर रखते हुए एड़ी को खड़े पैर के टखने के पास भी रख सकते हैं।
स्टेप 3: शरीर को स्थिर रखें
रीढ़ को सीधा रखें और शरीर को किसी एक तरफ झुकाने से बचें। संतुलन बनाने में परेशानी हो तो दीवार या मजबूत कुर्सी का सहारा लें।
स्टेप 4: हाथों को जोड़ें
दोनों हथेलियों को छाती के सामने जोड़ लें। सहज महसूस होने पर हाथों को धीरे-धीरे सिर के ऊपर ले जा सकते हैं।
स्टेप 5: सांस पर ध्यान दें
सामने किसी स्थिर बिंदु पर नजर टिकाएं और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। सांस रोकने या शरीर को जबरदस्ती स्थिर रखने की कोशिश न करें।
स्टेप 6: दूसरे पैर से भी अभ्यास करें
कुछ सेकंड तक अपनी क्षमता के अनुसार इस मुद्रा में रहें। फिर धीरे से पैर नीचे लाएं और दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। अभ्यास बढ़ने के साथ समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
वृक्षासन करते समय इन गलतियों से बचें
- पैर को घुटने पर न रखें: मुड़े हुए पैर के तलवे को खड़े पैर के घुटने पर रखने से बचें। इसे घुटने के नीचे पिंडली या घुटने के ऊपर जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें।
- घुटने को जबरदस्ती पीछे न खींचें: खड़े पैर को सहज और स्थिर रखें।
- शरीर को एक तरफ न झुकाएं: रीढ़ सीधी रखने और कूल्हों को संतुलित रखने का प्रयास करें।
- सांस न रोकें: पूरे अभ्यास के दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
- जल्दबाजी न करें: शुरुआत में पैर को जांघ तक उठाना या लंबे समय तक आसन में बने रहना जरूरी नहीं है।
किन लोगों को वृक्षासन करते समय सावधानी रखनी चाहिए?
वृक्षासन कई लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में विशेष सावधानी जरूरी है।
- जिन्हें बार-बार चक्कर आते हैं या संतुलन बनाने में परेशानी होती है, वे सहारे के बिना अभ्यास न करें।
- घुटने, टखने, पैर या कूल्हे में दर्द अथवा हाल की चोट होने पर डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक की सलाह लें।
- गर्भावस्था में शरीर का संतुलन बदल सकता है। ऐसे में सहारे के साथ और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही अभ्यास करें।
- यदि किसी बीमारी या शारीरिक समस्या के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होती है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- अभ्यास के दौरान तेज दर्द, चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत रुक जाएं।
रोज कितनी देर करना चाहिए वृक्षासन?
शुरुआत में प्रत्येक पैर से कुछ सेकंड तक अभ्यास करना पर्याप्त हो सकता है। जब संतुलन बेहतर होने लगे, तो अपनी सुविधा के अनुसार समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। इसे सुबह योग करते समय या दिन में सुविधानुसार किया जा सकता है।
ध्यान रखें कि केवल वृक्षासन करने से संपूर्ण फिटनेस हासिल नहीं होती। बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित पैदल चलना, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम और अपनी क्षमता के अनुसार दूसरे योगासन भी दिनचर्या में शामिल करें।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। वृक्षासन के फायदे हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यदि आपको कोई बीमारी, पुरानी चोट या संतुलन से जुड़ी समस्या है, तो अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक से सलाह लें।



