अगर आपने कई सालों तक स्मोकिंग की है या लंबे समय तक प्रदूषण के बीच रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या फेफड़े दोबारा ठीक हो सकते हैं? भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत, हर एक महीने में कोल्डकफ हो जाना या फिर फेफड़ों से जुड़ी दूसरी दिक्कतें लोगों में बनी रहती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि स्मोकिंग न करने वालों के लंग्स भी कमजोर हो रहे हैं.

उत्तर भारत समेत देश के अधिकतर हिस्सों में प्रदूषण के बिगड़े हुए लेवल ने लोगों को बीमार बना रखा है. पॉल्यूशन के कॉन्टैक्ट में रहने और स्मोकिंग की वजह से डैमेज हुए फेफड़े क्या रिकवर कर सकते हैं? चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए समझाते हैं…
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
डॉक्टर सुशिल कुमार उपाध्याय का कहना है कि अच्छी बात यह है कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद फेफड़ों में कुछ हद तक सुधार हो सकता है. हालांकि, कितना सुधार होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फेफड़ों को कितना नुकसान हुआ है.
स्मोकिंग को पूरी तरह छोड़ना
सबसे जरूरी कदम है स्मोकिंग पूरी तरह छोड़ना. सिगरेट का धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और सांस की नली में जमा गंदगी और बलगम को बाहर निकालने की क्षमता भी कम कर देता है. स्मोकिंग छोड़ने के बाद शरीर धीरे धीरे खुद को ठीक करना शुरू करता है. खांसी, बलगम और सांस फूलने जैसी दिक्कतों में भी समय के साथ सुधार हो सकता है.
पॉल्यूशन से कैसे करें बचाव
अगर प्रदूषण ज्यादा है, तो उससे बचने की कोशिश करें. एयर क्वालिटी बहुत खराब हो तो बाहर एक्सरसाइज करने से बचें और जरूरत पड़ने पर अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें.
इन बातों का रखें ध्यान
इसके अलावा, नियमित एक्सरसाइज करें. इससे आपकी सांस लेने की क्षमता और शरीर की फिटनेस बेहतर रखने में मदद मिलती है. लेकिन अगर फेफड़ों को पहले ही स्थायी नुकसान हो चुका है, तो वह पूरी तरह वापस नहीं आता. इसलिए लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में परेशानी या बार बार सांस से जुड़ी बीमारी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं.



