नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने मंगलवार को घोषणा की कि सरकार 15 अक्टूबर से चुनिंदा पर्सनटूमर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करेगी. इसके तहत, मर्चेंट्स को 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी और 75,000 रुपए या उससे ज्यादा के पेमेंट पर अधिकतम 300 रुपए की फीस देनी होगी. इस नए फ्रेमवर्क का मकसद UPI इकोसिस्टम के लिए एक ज्यादा टिकाऊ कमर्शियल मॉडल बनाना है. इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, इनोवेशन और कस्टमर सर्विस में निवेश के लिए किया जाएगा. इस कदम से रोजाना होने वाले ज्यादातर UPI पेमेंट नए चार्ज स्ट्रक्चर के दायरे से बाहर रहेंगे. अधिकारियों द्वारा जारी FAQ के अनुसार, 2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा और ये UPI के P2M ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 95 फीसदी से ज्यादा हिस्सा हैं.
National Payments Corporation of India : A revised UPI Merchant Discount Rate framework will take effect on select merchant transactions starting October 15, 2026, while keeping UPI completely free of cost for consumers and all transactions up to ₹2,000. Under pic.twitter.com/F7oFn8bhdL
— ANI September 15, 2026
कस्टमर्स से UPI पेमेंट करने के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, और पर्सनटूपर्सन ट्रांसफर भी फ्री रहेंगे. P2PM फ्रेमवर्क के तहत आने वाले छोटे मर्चेंट्स, जिनमें UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपए तक पाने वाले वेंडर शामिल हैं, MDR से सुरक्षित रहेंगे. 3,000 रुपए के UPI पेमेंट पर 12 रुपए का MDR लगेगा. 50,000 रुपए के ट्रांजैक्शन पर 200 रुपए का MDR लगेगा. 75,000 रुपए और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी. इसका मतलब है कि 1 लाख रुपए के पेमेंट पर 300 रुपए का चार्ज लगेगा, न कि 400 रुपए .
इस फ्रेमवर्क में कुछ खास सेक्टर के लिए रियायती दरें भी दी गई हैं. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे सेक्टर में 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर स्टैंडर्ड 0.4% रेट के बजाय 5 रुपए का फ्लैट MDR लगेगा. कैपिटलमार्केट ट्रांजैक्शन, जिसमें म्यूचुअल फंड, स्टॉकब्रोकर और सिक्योरिटीज डीलर को किए जाने वाले पेमेंट शामिल हैं, पर 0.02 फीसदी का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी. NPCI ने साफ किया कि MDR का बोझ मर्चेंट्स उठाएंगे और इसे कस्टमर्स पर नहीं डाला जा सकता. इसका मतलब है कि UPI का इस्तेमाल करते समय ग्राहक लिस्टेड कीमत ही चुकाते रहेंगे और UPI ऐप्स की तरफ से कोई अलग ट्रांजैक्शन या प्लेटफॉर्म फीस नहीं ली जाएगी.



