
गोगी का अपराध से पहला वास्ता करीब 17 साल की उम्र में एक मामूली झगड़े से हुआ था. कॉलेज की रंजिश और पिता की मौत के बाद हालात कुछ ऐसे बने कि गोगी अपराध के दलदल में धंसता ही चला गया. 2013 में गैंगस्टर नीतू डबोदिया के एनकाउंटर और 2015 में नीरज बवाना की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली-एनसीआर के अपराध जगत में जो खालीपन आया, उसे गोगी और टिल्लू दोनों ने अपने सिंडिकेट से भरना शुरू कर दिया था.
गैंगस्टर गोगी ने कुलदीप उर्फ फज्जा और रोहित मोई जैसे शार्पशूटर्स को अपने गैंग से जोड़कर एक खौफनाक नेटवर्क तैयार किया. उसने हरियाणा के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी के साथ हाथ मिलाया. दूसरी तरफ टिल्लू ताजपुरिया ने नीरज बवाना, नवीन बाली, सुनील राठी और बम्बीहा सिंडिकेट के साथ थाम लिया. दोनों तरफ से जबरन वसूली, जमीन पर कब्जे और सुपारी किलिंग की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था.
2015 के बाद दोनों गैंग्स ने अपने गुर्गों को साफ कह दिया था कि जो सामने दिखे, उसे ढेर कर दो. यानी अब दोनों ही गैंग्स एक दूसरे को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं थे. इसी कड़ी में, गोगी गैंग ने टिल्लू के करीबी दीपक उर्फ राजू की हत्या कर दी. इसके जवाब में टिल्लू गैंग ने गोगी के करीबी साथी अरुण उर्फ कमांडो की हत्या कर दी. इसके बाद निरंजन मास्टर, सुमित और देवेंद्र प्रधान जैसे कई नाम इस रंजिश की भेंट चढ़ गए.
इन हत्याकांड के बाद पुलिस ने गोगी को अरेस्ट कर सलाखों के पीछे भेज दिया. लेकिन 2016 में जब हरियाणा पुलिस उसे बहादुरगढ़ से पेशी पर ले जा रही थी, तब उसके साथियों ने पुलिसकर्मियों पर मिर्च पाउडर झोंककर उसे छुड़ा लिया था. अपनी फरारी के दौरान गोगी पर हत्या, रंगदारी और डकैती के दर्जनों मामले दर्ज हुए. उस पर दिल्ली व हरियाणा पुलिस की ओर से लाखों का इनाम घोषित किया गया.
मार्च 2020 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सीक्रेट ऑपरेशन में गुरुग्राम के एक फ्लैट से गोगी, कुलदीप फज्जा और रोहित मोई को हथियारों के जखीरे के साथ दबोच लिया. गिरफ्तारी से ठीक पहले गोगी ने एनकाउंटर के डर से सोशल मीडिया पर सरेंडर की घोषणा का वीडियो भी जारी किया था. उस पर मकोका लगाया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया. टिल्लू ताजपुरिया पहले से ही सलाखों के पीछे था. दोनों जेल के अंदर से रंगदारी और गैंगवार की वारदातों को अंजाम देते रहे.



