इस्लामाबाद: बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी सशस्त्र गुट बलूच लिबरेशन आर्मी ने एक बार फिर पाकिस्तानी आर्मी को निशाना बनाया है। बलूचिस्तान में दो अलगअलग जगहों पर बीएलए ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर अटैक किया। ये हमले जियारत क्रॉस और सुराब के हाजिका इलाके में किए गए हैं। दोनों हमलों में बीएलए ने पाकिस्तानी फोर्स के कुल 25 जवानों की मौत होने का दावा किया है, जो पाक आर्मी असीम मुनीर के सामने नई चुनौती है।
बीएल के अटैक बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों की लंबी समय से चल रही कड़ी का हिस्सा हैं। जियारत क्रॉस के आसपास एक हफ्ते के भीतर हुआ ये तीसरा बड़ा हमला है। बीएलए ने बयान जारी करते हुए हमलों की जानकारी दी और आगे भी अपने अटैक जारी रखने का दावा किया।
जियारत क्रॉस पर 18 जवानों की मौत
बीएलए ने गुरुवार को अपने बयान में दावा किया कि उसके लड़ाकों ने जियारत क्रॉस पर पाकिस्तानी सेना के काफिले की चार गाड़ियों को निशाना बनाया। इनमें मिलिट्री ट्रक भी शामिल था। हमले में दोनों वाहन पूरी तरह से नष्ट हो गए। समूह ने दावा किया कि इस हमले में पाकिस्तानी सेना के 18 जवान मारे गए और पांच घायल हालत में भागने में कामयाब हुए।
BLA के मुताबिक जियारत क्रॉस हमला उसके फतह स्क्वाड ने किया, जिसमें पाक आर्मी के हथियार भी छीन लिए गए। सुराब में एक अलग हमले में सात और सुरक्षाकर्मी मारे गए। यहां बीएलए के स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशन्स स्क्वाड ने पाकिस्तानी बलों को निशाना बनाने के लिए रिमोटकंट्रोल्ड धमाके में विस्फोटक से लदी गाड़ी का इस्तेमाल किया।
बलूचिस्तान में सर्च ऑपरेशन
बीएलए के हमलों के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। सुरक्षाबल हमलों में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं। सर्च ऑपरेशन के दौरान भी कई जगहों पर गोलीबारी होने की जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी है।
BLA ने बलूचिस्तान में बारबार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाया है, जिन्हें यह गुट कब्जा करने वाली फोर्स कहती है। समूह ने यह भी दावा किया है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के खिलाफ उसका अभियान जारी रहेगा और पाक आर्मी को प्रांत से बाहर निकाला जाएगा।
बलूचिस्तान में अशांति
बलूचिस्तान में हिंसा और अलगाववादी आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है लेकिन 1947 के बाद से ही यहां अस्थिरता रही है। कई संगठन और सशस्त्र गुट लगातार पाकिस्तानी आर्मी और सरकार के खिलाफ लड़ते रहे हैं। इन गुटों की मांग पाकिस्तान अनसुनी करता है, जिससे गुस्सा और भड़क रहा है।

