Satya Report: Balotra News: पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक नक्शे को बदलने वाली बालोतरा के पचपदरा में बनी HPCL की रिफाइनरी में उद्घाटन के एक दिन पहले आग लग गई, जिससे कल 21 अप्रैल को PM मोदी का दौरा और उद्घाटन समारोह स्थगित कर दिया गया. 2012 में बाड़मेर के लीलाणा से पचपदरा तक स्थान परिवर्तन, राजनीतिक विवाद, बढ़ती लागत, दोबारा शिलान्यास और उद्घाटन से ठीक पहले लगी आग के इस परियोजना को बहुचर्चित बना दिया है. आइए जानते हैं पचपदरा रिफाइनरी के बारे में…

बदा दें कि यह रिफाइनरी शुरु में बाड़मेर जिले के बायतु तहसील के लीलाणा गांव में बननी थी. उस समय अशोक गहलोत सरकार ने इसकी नींव रखी थी, लेकिन तत्कालीन राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी और बायतु विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी अपनी सरकार के विरोध में उतरे. यही नहीं मंत्री हेमाराम ने इस्तीफा दे दिया. तत्कालीन CM अशोक गहलोत ने मनाने के लिए प्रतिनिधि भी भेजे, लेकिन विरोध शांत नहीं हुआ, जिसके बाद मजबूरन रिफाइनरी पचपदरा स्थानांतरित कर दिया गया. बाद में इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ और तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 2013 में पचपदरा में इसका शिलान्यास किया.
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पहले प्रदेश और फिर केंद्र में सरकार बदलने से रुका काम
रिफाइनरी परियोजना के पहले शिलान्यास के समय प्रदेश और केंद्र में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार थी, लेकिन 2013 में प्रदेश में हुए विधानसभा और 2014 लोकसभा में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई. फिर 4 साल तक यह परियोजना ठंडे बस्ते में रही. 2018 में तत्कालीन CM वसुंधरा राजे ने PM मोदी के हाथों पुनः इसका शिलान्यास करवाया, लेकिन प्रदेश में फिर सरकार बदल गई और कमान एक बार फिर अशोक गहलोत के हाथ में आ गई. .
धीरे-धीरे रिफाइनरी का काम शुरू हुआ. साल 2023 में इसको चालू करने का लक्ष्य था, लेकिन काम में देरी होती गई और फिर प्रदेश में सरकार बदल गई. देरी के चलते रिफाइनरी की शुरुआती लागत करीब 43 हजार करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर करीब 72 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई. देरी, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक परिस्थितियां इसके प्रमुख कारण रहे. यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है. इसमें HPCL की 76 और 24 प्रतिशत राजस्थान सरकार हिस्सेदारी है. इससे राज्य को राजस्व और रोजगार के बड़े अवसर मिलने की उम्मीद है.
पचपदरा रिफाइनरी खासियत जानें
करीब 79 लाख 459 करोड़ रुपए की लागत से 450 एकड़ में बनी पचपदरा रिफाइनरी की क्षमता लगभग 9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MMTPA) है. यह अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और इसमें पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भी शामिल है. सबसे खास बात यह है कि इस रिफाइनरी को ग्रीन और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) कॉन्सेप्ट पर विकसित किया गया है. ग्रीन तकनीक के तहत प्रदूषण और गैस उत्सर्जन को न्यूनतम रखने की व्यवस्था की गई है. वहीं जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम के तहत फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को पूरी तरह ट्रीट कर दोबारा उपयोग में लिया जाता है, जिससे बाहर एक बूंद भी प्रदूषित पानी नहीं छोड़ा जाता.
कैसे रिफाइनरी तक आएगा क्रूड ऑयल?
इस रिफाइनरी में फिल्टर हेतु आने वाला कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल बाड़मेर के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल और गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से पाइपलाइन के जरिए आएगा. इसके लिए मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल से 74 किलोमीटर, जैसलमेर के नाचना से 230 और मुंद्रा पोर्ट से करीब 487 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन रिफाइनरी तक लाई गई है, लेकिन कच्चा तेल फिल्टर करने के यूनिट में ही सोमवार को आग लग गई, जिससे यह उद्घाटन स्थगित हो गया. ऐसे में प्रदेश को इसके शुरू होने में और भी इंतजार करना पड़ेगा.
उद्घाटन से पहले ही रिफाइनरी के 2 यूनिट में लगी आग
इसी बीच उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले सोमवार को रिफाइनरी के दो यूनिट CDU यानी क्रूड डिस्टिलेशन और VDU यानी वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट में भीषण आग लग गई, जिससे अफरातफरी मच गई. आग की सूचना पर फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया.
उद्घाटन समारोह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा को लेकर तैयारी अंतिम दौर में थीं. रिफाइनरी से एक किलोमीटर दूर जनसभा स्थल बनाया गया था. बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, जालौर और जोधपुर से बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता जनसभा में आने वाले थे. ऐसे में एक दिन पहले लगी आग ने पश्चिम में राजस्थान के लोगों की उम्मीद पर कुछ समय के लिए पानी फेर दिया.
(रिपोर्ट-राजू माली/बाड़मेर)



