Abhishek Sharma: भारत और अफगानिस्तान के बीच कल 3 मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा और अंतिम टी20 मैच दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया. 3 मैचों के इस मुकाबले में टीम इंडिया पहली बार पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरी. भारत के लिए अभिषेक शर्मा ने पहली ही गेंद से ताबड़तोड़ बल्लेबाजी शुरू की.

अभिषेक शर्मा ने 34 गेंदों में 9 चौके और 11 छक्के की मदद से 108 रनों की पारी खेली जिसके बाद उन्हें मैन ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. अवार्ड लेते हुए अभिषेक शर्मा ने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं.
Abhishek Sharma ने बताया कैसा ठोका सबसे तेज 30 गेंद में 100 रन
30 गेंदों में 100 रन यह कैसे होता है? अभिषेक शर्मा ने कहा कि,
“देखिए सर, मैंने अपने पहले इंटरव्यू में भी कहा था कि हम पिछले दो साल से ऐसा कर रहे हैं. मैंने पहले भी कहा है कि एक या दो खराब सीरीज़ से बैटिंग डिपार्टमेंट के तौर पर हमारी पहचान तय नहीं होती, क्योंकि हम वर्ल्ड कप से पहले पूरे साल दबदबा बनाए रखना चाहते थे, चाहे हम किसी के भी खिलाफ खेल रहे हों. लेकिन एक बैटर और क्रिकेटर के तौर पर मुझे लगता है कि कभीकभी उतारचढ़ाव आते रहते हैं. अहम बात यह है कि टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल कैसा है क्योंकि ऐसे समय में हमें एक यूनिट की तरह रहना होता है, अगले गेम पर फोकस करना होता है और अपना दबदबा बनाए रखना होता है.”
अभिषेक शर्मा ने इन दो को दिया अपनी पारी का श्रेय
“मुझे लगता है कि यह सब उस प्रोसेस पर निर्भर करता है जिसे मैं हर सीरीज़ से पहले फॉलो करता हूँ. मेरे लिए यह बहुत खास होता है कि मैं किसके खिलाफ खेलने जा रहा हूँ और गेंदबाज कौन होंगे. इसलिए, एक बैटर के तौर पर मेरे लिए हमेशा प्रोसेस ही अहम रहा है: मैं पावरप्ले का इस्तेमाल कैसे करूँगा, पावरप्ले में मुझे कौन गेंदबाजी करेगा, और फिर सातवें या आठवें ओवर में क्या होगा. मेरे लिए ये बातें बहुत खास होती हैं.”
अभिषेक शर्मा ने आगे कहा कि
“मुझे लगता है कि जब आप इस खास तरीके से खेलना चाहते हैं, तो कप्तान और कोच का आपके साथ होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि आपको मैनेजमेंट, कोच और कप्तान से भरोसा मिलना चाहिए. इसलिए मुझे लगता है कि उन्हीं की वजह से हम पिछले कुछ सालों से ऐसा कर रहे हैं, और उम्मीद है कि आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे.”
Abhishek Sharma ने बताया कैसे आसानी से जड़ते हैं छक्के
“मेरे लिए, मैं किसी खास हिस्से तक सीमित नहीं रहना चाहता. बस गेंद को देखो और उसके हिसाब से खेलो. मेरे लिए यह पहले दिन से ही बहुत आसान रहा है. मैं बस जाकर खुलकर खेलना चाहता हूँ, और गेंद पर ज़बरदस्ती शॉट नहीं मारना चाहता. बस गेंद को देखना और हिट करना है, और आने वाले सभी मैचों में भी मेरे लिए यही तरीका रहेगा. लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, आप हमेशा यह पक्का नहीं कह सकते कि आप बहुत अच्छा ही खेलेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि हमारी टीम में जो कल्चर बन रहा है, उसमें हमें डॉमिनेट करना है और पावरप्ले का फ़ायदा उठाना है, और यह सब बहुत अच्छा चल रहा है.”



