
कानपुर में करोड़पति दवा कारोबारी की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले की कई परतें खुलती चली गईं। शुरुआत में यह मामला घर में घुसकर की गई हत्या जैसा दिखाई दिया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस का शक परिवार के करीबी लोगों और पुराने नौकर तक पहुंच गया।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात हत्या से पहले के 21 दिनों की कॉल डिटेल रही। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी की बहू शालू और उसके पति सुब्रत की पुराने नौकर विशाल गौतम से इस दौरान करीब 330 बार बातचीत हुई थी। इनमें शालू की करीब 30 कॉल और सुब्रत की करीब 300 कॉल बताई गईं।
अब पुलिस इन कॉल्स के समय, अवधि और पैटर्न की जांच कर रही थी ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये बातचीत सामान्य कामकाज को लेकर थी या फिर कथित हत्या की साजिश से इनका कोई संबंध था।
पुराने नौकर से लगातार संपर्क ने बढ़ाया शक
जांच के दौरान पुलिस की नजर विशाल गौतम पर गई थी। विशाल पहले कारोबारी के परिवार में काम कर चुका था। करीब छह साल पहले चोरी के आरोप के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसका परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, वह कभी-कभी परिवार के घर आता-जाता था। पुराने कर्मचारी होने के कारण उसे घर की बनावट, आने-जाने के रास्तों और परिवार की दिनचर्या की जानकारी थी।
यही वजह थी कि हत्या के बाद विशाल का नाम सामने आते ही पुलिस ने उसके पुराने संबंधों और मोबाइल संपर्कों को खंगालना शुरू कर दिया था।
330 कॉल को लेकर सुब्रत ने क्या कहा?
पुलिस की पूछताछ में इतनी बड़ी संख्या में फोन कॉल सामने आने के बाद सुब्रत से भी सवाल किए गए थे। उसका कहना था कि विशाल पहले परिवार के साथ काम कर चुका था और छोटे-मोटे कामों के सिलसिले में उससे फोन पर बातचीत होती थी।
हालांकि, पुलिस केवल इस बयान के आधार पर संतुष्ट नहीं हुई थी। जांचकर्ताओं ने यह देखना शुरू किया था कि हत्या की तारीख नजदीक आने के साथ इन कॉल्स की संख्या और समय में कोई बदलाव आया था या नहीं।
फिलहाल इन फोन कॉल्स में हुई बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया था।
घर की डुप्लीकेट चाबी ने भी खड़े किए सवाल
जांच के दौरान घर में प्रवेश से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, घर की मूल चाबी के आधार पर गुमटी में डुप्लीकेट चाबी बनवाई गई थी।
विशाल के पुराने कर्मचारी होने और घर की जानकारी रखने के कारण पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही थी। सवाल यह था कि डुप्लीकेट चाबी किसके कहने पर बनवाई गई और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था।
पुलिस इस जानकारी को CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे साक्ष्यों के साथ जोड़कर देख रही थी।
6 लाख रुपये की कथित सुपारी का एंगल
जांच में पुलिस के सामने हत्या के लिए कथित तौर पर 6 लाख रुपये की डील का एंगल भी आया था।
पुलिस के मुताबिक, विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर बताया था कि उन्हें कारोबारी की हत्या के लिए शालू की तरफ से योजना दी गई थी। आरोप था कि हत्या के बदले 6 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी।
बताया गया कि इसमें 2 लाख रुपये हत्या के बाद और बाकी 4 लाख रुपये करीब 15 दिन बाद देने की कथित डील हुई थी। पुलिस के अनुसार, हत्या के लिए 5 सितंबर की तारीख भी तय की गई थी।
हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि जांच के बाद ही होनी थी।
CCTV ने खोली जांच की नई दिशा
कारोबारी की हत्या के बाद पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली थी। इसमें विशाल और राजकिशोर के फ्लैट में आने-जाने की गतिविधियां सामने आई थीं।
पुलिस के मुताबिक, दोनों वारदात से पहले फ्लैट में पहुंचे थे और कारोबारी के लौटने का इंतजार करते हुए काफी देर तक अंदर छिपे रहे थे।
इसी फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था।
गार्ड को पहले ही दी गई थी सूचना
जांच में सिक्योरिटी गार्ड से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, वारदात से पहले गार्ड को फोन करके बताया गया था कि एक व्यक्ति अपने दोस्त के साथ फ्लैट पर आएगा।
कथित तौर पर गार्ड को दोनों को अंदर आने देने और रजिस्टर में एंट्री नहीं करने के लिए कहा गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी थी कि गार्ड को फोन किसने किया था और दोनों युवकों के फ्लैट तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे हुई थी।
पार्टी के लिए घर से निकले थे बेटा-बहू
हत्या वाली रात की टाइमलाइन भी पुलिस की जांच का अहम हिस्सा बनी थी।
जानकारी के मुताबिक, कारोबारी के बेटे सुब्रत और उसकी पत्नी शालू रात करीब 9:36 बजे पार्टी के लिए घर से निकले थे। इसके करीब 10 मिनट बाद दो लोग फ्लैट में दाखिल हुए थे।
पुलिस के अनुसार, दोनों ने अंदर पहुंचकर कारोबारी के लौटने का इंतजार किया था। करीब 72 से 75 मिनट तक वे अंदर छिपे रहे। रात करीब 10:58 बजे कारोबारी घर लौटे, जिसके बाद उन पर हमला किया गया था।
वारदात के बाद दोनों आरोपितों के कपड़े बदलकर वहां से निकलने की बात भी जांच में सामने आई थी।
कारोबारी पर किए गए थे कई वार
वारदात कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में हुई थी। उस समय कारोबारी घर में अकेले थे।
पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने चाकू से उन पर कई वार किए थे। रविवार सुबह करीब 4 बजे जब बेटा और बहू घर लौटे, तब हत्या की जानकारी सामने आई थी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और अपार्टमेंट में लगे CCTV कैमरों की जांच शुरू की गई। इसी जांच में पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर की गतिविधियां पुलिस के सामने आई थीं।
लूट नहीं हुई तो हत्या की वजह क्या थी?
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल हत्या की वजह को लेकर था। वारदात के बाद घर से नकदी, जेवर या कोई बड़ी कीमती चीज गायब होने की बात सामने नहीं आई थी।
ऐसे में पुलिस इसे केवल लूट के लिए की गई हत्या मानकर नहीं चल रही थी। जांच का एक पहलू परिवार के भीतर के विवाद और आर्थिक कारणों से भी जुड़ा था।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी थी कि आखिर कारोबारी की हत्या की कथित साजिश क्यों रची गई और इसके पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
जांच में बहू की भूमिका पर भी उठा सवाल
हत्या के बाद शुरुआत में परिवार के लोगों ने भी सदमे और दुख का सामना किया था। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने CCTV, कॉल डिटेल, गार्ड के बयान और पुराने कर्मचारी से जुड़े तथ्यों को जोड़ा, जांच परिवार के करीबी लोगों की ओर भी बढ़ती गई।
विशाल और राजकिशोर के कथित बयानों में शालू का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसकी भूमिका की जांच शुरू की थी।
इसके बाद उससे पूछताछ की गई और पुलिस ने उसके मोबाइल संपर्कों समेत अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।
पूछताछ के बाद गिरफ्तारी का दावा
पुलिस के मुताबिक, शालू से कई सवाल पूछे गए थे। शुरुआत में उसने हत्या की साजिश में शामिल होने से इनकार किया था।
इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर उससे पूछताछ जारी रखी। पुलिस का दावा था कि पूछताछ के दौरान शालू ने कथित तौर पर हत्या की योजना में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली थी।
इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डुप्लीकेट चाबी, आरोपितों के बयान और कथित पैसों की डील समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही थी। हत्या की साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और वास्तविक मकसद क्या था, इसका अंतिम सच जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होना था।



