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रूस से बिहार पहुंचीं 5 महिलाएं, भारतीय परंपरा अपनाकर किया पिंडदान; पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना.

रूस से बिहार पहुंचीं 5 महिलाएं, भारतीय परंपरा अपनाकर किया पिंडदान; पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना.

गयाजी: पितृपक्ष के दौरान बिहार के गयाजी में आस्था की एक अनोखी तस्वीर सामने आई। रूस से पहुंचीं पांच महिलाओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ पारंपरिक विधि-विधान से पिंडदान किया। भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में पूजा करती इन महिलाओं को देखकर देवघाट पर मौजूद लोगों का ध्यान उनकी ओर खिंच गया।

इस्कॉन मंदिर से मिली पिंडदान की प्रेरणा

रिपोर्ट के मुताबिक, इन महिलाओं को इसी साल जुलाई में इस्कॉन मंदिर जाने के दौरान पितृ ऋण और सनातन परंपरा में पिंडदान के महत्व के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने गयाजी पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान करने का फैसला किया।

देवघाट पर विधि-विधान से किया अनुष्ठान

पितृपक्ष के दौरान गयाजी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने पहुंचते हैं। यहां विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के तट का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मकांडों से उनकी आत्मा की शांति और सद्गति की कामना की जाती है।

रूस से आईं पांच महिलाओं ने भी इसी आस्था के साथ अनुष्ठान किया। उनकी इस पहल ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी रुचि चर्चा का विषय बन गई।

यह घटना दिखाती है कि धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मान्यताओं के प्रति आकर्षण किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं है। अलग-अलग देशों से आने वाले लोग भी इन परंपराओं को समझने और उनमें भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

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