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60 घंटे तक मलबे में दबी रही 6 साल की बच्ची, अचानक सुनाई दी रोने की आवाज; रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला​​​​​​​

Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे इलाके में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद एक ऐसा रेस्क्यू हुआ, जिसने राहत और बचाव अभियान में उम्मीद जगा दी। करीब 6 साल की एक बच्ची बाढ़ के बाद जमा हुए मलबे और कीचड़ के नीचे करीब 55 से 60 घंटे तक दबी रही, लेकिन आखिरकार उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

यह बच्ची तिमुरे इलाके में बाढ़ के बाद मलबे के नीचे फंस गई थी। आसपास तबाही का मंजर था और राहत-बचाव टीमें लगातार लोगों की तलाश में जुटी थीं।

मलबे के नीचे से आई रोने की आवाज

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की टीम को अचानक मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी।

आवाज का पता लगाकर जवानों ने सावधानी से मलबा हटाना शुरू किया। काफी प्रयास के बाद बच्ची तक पहुंच बनाई गई और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रेस्क्यू टीम के लिए यह पल बेहद राहत भरा था, क्योंकि बच्ची कई घंटों तक मलबे के नीचे फंसी रहने के बावजूद जीवित थी।

शरीर मलबे में दबा था, चेहरा सुरक्षित रहा

बताया गया कि बच्ची का ज्यादातर शरीर मिट्टी, कीचड़ और मलबे के नीचे दबा हुआ था। उसके सिर के ऊपर लकड़ी की एक संरचना गिरी हुई थी, जिसकी वजह से उसका चेहरा खुला रह गया था।

रेस्क्यू के बाद बच्ची को तुरंत तिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट ले जाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।

इसके बाद उसकी हालत को देखते हुए हेलीकॉप्टर के जरिए उसे काठमांडू के अस्पताल पहुंचाया गया।

चेहरे और पीठ पर आई चोटें

अस्पताल ले जाने के बाद बच्ची का इलाज शुरू किया गया। जानकारी के मुताबिक उसके चेहरे और पीठ पर चोटें आई हैं, लेकिन चोटों को जानलेवा नहीं बताया गया है।

कई घंटों तक मलबे के नीचे फंसे रहने के बावजूद बच्ची का सुरक्षित मिलना राहत और बचाव टीम के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

माता-पिता भी बचे, अस्पताल में चल रहा इलाज

रेस्क्यू के शुरुआती समय में बच्ची के माता-पिता के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई थी। बाद में पता चला कि वे भी इस आपदा में बच गए हैं और उनका इलाज चल रहा है।

परिवार के लिए बच्ची का जिंदा मिलना किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

तबाही के बीच उम्मीद की किरण

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई इस भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर और सड़कें मलबे में तब्दील हो गईं और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।

ऐसे मुश्किल हालात के बीच करीब 60 घंटे बाद एक छोटी बच्ची का जिंदा मिलना राहत अभियान से जुड़े लोगों के लिए उम्मीद की बड़ी खबर बन गया है।

मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश में जुटी रेस्क्यू टीम को जब बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी, तो बचाव अभियान में जुटे लोगों ने तुरंत पूरी ताकत लगा दी। आखिरकार बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

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