
अमरोहा में एक बुजुर्ग मां ने अपने बेटे की हत्या के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए चार साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। 65 वर्षीय शकुंतला देवी करीब 60 तारीखों पर अदालत पहुंचीं और हर बार अपने बड़े बेटे के साथ न्याय की उम्मीद लेकर कोर्ट गईं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और अदालत ने बेटे की हत्या के दोषी उसकी पत्नी नीतू और उसके प्रेमी आरिफ को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसला आने के बाद शकुंतला देवी की आंखों में आंसू आ गए। बेटे को खोने का दर्द तो खत्म नहीं हुआ, लेकिन लंबे संघर्ष के बाद उन्हें यह संतोष जरूर मिला कि उसके हत्यारों को सजा मिल गई।
चार साल पहले हुई थी बेटे की हत्या
मामला 21 अक्टूबर 2022 की रात का है। आरोप के मुताबिक, ओमकार की उसकी पत्नी नीतू और उसके प्रेमी आरिफ ने तार से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। घटना के दौरान ओमकार की मां शकुंतला देवी भी घर में मौजूद थीं।
बताया गया कि जब ओमकार की चीख सुनाई दी तो शकुंतला देवी दौड़कर कमरे में पहुंचीं। उन्होंने वहां आरिफ को देखा और उसे मौके से भागते हुए भी देखा। महिला ने घटना के संबंध में पुलिस को सूचना दी और प्राथमिकी दर्ज कराई।
हत्या को आत्महत्या दिखाने की कोशिश का आरोप
मामले की शुरुआत में हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और शकुंतला देवी की गवाही ने मामले की दिशा बदल दी।
बुजुर्ग मां इस केस की प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह रहीं। बढ़ती उम्र और शारीरिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अदालत में अपनी गवाही दी और हर सुनवाई पर पहुंचती रहीं।
60 तारीखों पर अदालत पहुंची मां
करीब चार साल तक चले मुकदमे में लगभग 60 तारीखें पड़ीं। शकुंतला देवी अपने बड़े बेटे ओमप्रकाश के साथ अदालत पहुंचती थीं। उनका एक ही मकसद था कि बेटे की हत्या करने वालों को कानून के तहत सजा मिले।
लंबे इंतजार के बाद शनिवार को अदालत ने नीतू और आरिफ को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
फैसला सुनते ही छलक पड़े मां के आंसू
अदालत का फैसला सुनने के बाद शकुंतला देवी भावुक हो गईं। चार साल से जिस दिन का उन्हें इंतजार था, वह आखिरकार आ गया। बेटे को खोने का गम उनके लिए हमेशा रहेगा, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के बाद उन्हें लगा कि उनकी लड़ाई बेकार नहीं गई।
उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें न्याय मिला है और अब उन्हें उम्मीद है कि उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।
यह मामला उस मां के संघर्ष की मिसाल बन गया, जिसने बेटे की हत्या के बाद टूटने के बजाय न्याय पाने का संकल्प लिया और उम्र तथा कमजोरी की परवाह किए बिना चार साल तक अदालत के चक्कर लगाती रही।



