नई दिल्ली
अगर आप केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं या किसी कर्मचारी संगठन से जुड़े हैं, तो आपके लिए अहम खबर है। जी हां, क्योंकि 8वें वेतन आयोग ने वेतन, भत्तों और अन्य सेवा लाभों पर चर्चा के लिए दिल्ली में दो महत्वपूर्ण बैठकों का ऐलान किया है। आयोग 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को केंद्रीय सरकार और केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों के संगठनों, महासंघों और यूनियनों से बातचीत करेगा। इन बैठकों में हिस्सा लेने के इच्छुक पात्र कर्मचारी संगठनों को 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करना होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

आयोग ने साफ किया है कि केवल वही संगठन बैठक के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने पहले से अपना मेमोरेंडम जमा कर दिया है और अब तक दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बैठक नहीं की है। आवेदन करते समय संबंधित संगठन को अपना यूनिक मेमो आईडी भी देना होगा। बैठक का स्थान और समय बाद में अलग से बताया जाएगा।
इन बैठकों में कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर, नई सैलरी, महंगाई भत्ता , पेंशन, प्रमोशन, करियर ग्रोथ, सेवा शर्तों और अन्य भत्तों जैसे अहम मुद्दे आयोग के सामने रखेंगे। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं के आधार पर आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
8वें वेतन आयोग ने यह भी बताया कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले महीनों में दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी ऐसे परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि देशभर के कर्मचारी संगठनों की राय ली जा सके। दिल्लीएनसीआर से बाहर के संगठन अपने राज्य या नजदीकी स्थान पर बैठक के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इसके साथ ही आयोग ने एक और बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कर्मचारी डेटा अपलोड करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया गया डेटा ही स्वीकार किया जाएगा। ईमेल या हार्ड कॉपी के जरिए भेजी गई जानकारी पर विचार नहीं किया जाएगा।
दिल्ली की बैठकों के बाद आयोग की अगली बैठकें 7 और 8 सितंबर को चेन्नई तथा 9 सितंबर को पुडुचेरी में होंगी। इन स्थानों पर आयोग से मिलने के इच्छुक कर्मचारी संगठन 18 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल, लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य में वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं में बदलाव तय होगा।



