
राजस्थान के कोटा जिले में स्थित चंद्रेसल गांव के 1100 वर्ष पुराने मठ में शुक्रवार देर रात महंत देवानंद महाराज की बेरहमी से हत्या कर दी गई। अज्ञात हमलावरों ने मठ में घुसकर धारदार हथियार से उन पर कई वार किए। घटना के बाद साधु-संत समाज और हिंदू संगठनों में भारी रोष व्याप्त है, जबकि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 12 बजे महंत देवानंद महाराज और नंदनवन महाराज अपने-अपने कमरों में मौजूद थे। इसी दौरान कुछ हथियारबंद बदमाश मठ परिसर में दाखिल हुए। आरोप है कि हमलावरों ने सबसे पहले नंदनवन महाराज के कमरे को बाहर से बंद कर दिया, ताकि वे बाहर निकलकर मदद न कर सकें। इसके बाद बदमाश महंत देवानंद महाराज के कमरे में पहुंचे और उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
हमलावरों ने महंत की गर्दन और पीठ पर कई वार किए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मठ परिसर और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है।
करीब 35 वर्षीय महंत देवानंद महाराज मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की चौथ का बरवाड़ा तहसील के रजवाना गांव के निवासी थे। वे पिछले चार वर्षों से चंद्रेसल मठ में रहकर धार्मिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे। उनका संबंध मायापुरी अखाड़े से बताया जाता है और क्षेत्र में उनका विशेष सम्मान था।
कोटा देहात भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकुट नागर के अनुसार, हमलावर सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। फिलहाल हत्या के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।
डीसीपी रुद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले की जांच के लिए एफएसएल, एमओबी और डॉग स्क्वायड की टीमों को बुलाया गया है। पुलिस को आशंका है कि हत्या में एक से अधिक लोगों की संलिप्तता हो सकती है।
इस बीच मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने साधु नंदनवन पर संदेह जताया है। उनका आरोप है कि नंदनवन, महंत देवानंद महाराज से ईर्ष्या रखते थे। हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। संदेह के आधार पर नंदनवन को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।



