देश की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और बाजार नियामक सेबी के बीच विवाद अब और गहरा गया है। हाल ही में सेबी ने कंपनी और उसके चेयरमैन राजेश मेहता पर वित्तीय आंकड़ों में गड़बड़ी और रेवेन्यू को बढ़ाचढ़ाकर दिखाने के आरोप लगाए थे। लेकिन, अब कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उन्होंने सेबी को पहले ही 300 से 400 GB तक के डॉक्यूमेंट्स सौंप दिए थे, लेकिन शायद वो फाइलों तक नहीं पहुंच पाए।

पीटीआई के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने कहा कि सेबी के अंतरिम आदेश में कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को समझने में बड़ी गलती हुई है। उनके मुताबिक, सेबी ने कंपनी के EBITDA को ही रेवेन्यू यानी कुल आय मान लिया, जिससे गलत निष्कर्ष निकाला गया। उनका कहना है कि कंपनी ने लाखों पन्नों के बराबर डॉक्यूमेंट्स सेबी को जमा किए थे। उनका मानना है कि इन डॉक्यूमेंट्स की सही तरीके से जांच नहीं हो पाई, जिसके कारण यह पूरा विवाद पैदा हुआ।
आखिर कहां हुआ विवाद?
राजेश मेहता ने इसे एक साधारण उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि अगर कोई ग्राहक 30,000 रुपये का सोना खरीदता है, तो यह कंपनी का रेवेन्यू होता है। लेकिन उस बिक्री पर मिलने वाला 1000 रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट अलग चीज है। उनका आरोप है कि सेबी ने इसी ग्रॉस प्रॉफिट को रेवेन्यू मान लिया। कंपनी का कहना है कि गोल्ड कारोबार में मुनाफा बहुत कम होता है और कारोबार का आकार बहुत बड़ा होता है। ऐसे में रेवेन्यू और प्रॉफिट के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।
15 दिन में फिर सौंपे जाएंगे दस्तावेज
राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि विवाद को खत्म करने के लिए वह अगले 15 दिनों के भीतर सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स दोबारा सेबी को सौंपेगी। कंपनी को भरोसा है कि एक बार पूरी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। आपको बता दें कि सेबी ने अपनी रिपोर्ट में प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं के जरिए फंड के गलत इस्तेमाल का भी जिक्र किया था। लेकिन राजेश मेहता ने सेबी के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का एक भी पैसा प्रमोटर के प्राइवेट अकाउंट में नहीं गया और न ही किसी तरह का फंड डायवर्जन हुआ है।
निवेशकों को दिया भरोसा
सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई और निवेशकों को नुकसान हुआ। इस पर राजेश मेहता ने कहा कि यह केवल अस्थायी स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी की किताबें पूरी तरह साफ हैं और जरूरत पड़ने पर वह फोरेंसिक ऑडिट के लिए भी तैयार है।



