बिहार के साहेबगंज निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह को ‘गैरइरादतन हत्या’ के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी विधानसभा सदस्यता खोने का खतरा है. शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 2018 में न्यू ईयर पार्टी की पर दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी में उनके फार्महाउस पर की गई फायरिंग से हुई एक मौत के मामले में ‘गैरइरादतन हत्या’ का दोषी ठहराया. इस घटना में डॉ. अर्चना गुप्ता नाम की एक महिला की मौत हो गई थी.

इस दौरान विधायक की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य लोगों, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सबूत मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया गया. वहीं, कोर्ट अब मंगलवार यानी 9 जून को विधायक को दी जाने वाली सजा की अवधि पर दलीलें सुनेगी. अगर उन्हें दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता चली जाएगी. कोर्ट ने उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया है. जिस अपराध के लिए विधायक को दोषी ठहराया गया है, उसमें अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है.
हाई कोर्ट में अपील के बाद नहीं बचेगी सदस्यता!
कोर्ट ने विधायक को आईपीसी की धारा 304 और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया. आइए बताते हैं इन दोनों धाराओं में विधायक को कितने साल की सजा हो सकती है और उन पर कितना जुर्माना लग सकता है. साथ ही उनके राजनीतिक करियर पर इसका क्या असर पड़ेगा.
अगर विधायक राजू सिंह को दो साल से ज्यादा की सजा होती है, तो ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ के तहत ऐसे जनप्रतिनिधि को अयोग्य घोषित करना जरूरी हो जाता है। हालांकि उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है, लेकिन इससे उनकी सदस्यता नहीं बचेगी. अगर उच्च न्यायालय सजा पर रोक लगा देती है, तो राजू सिंह के लिए स्थिति कुछ बेहतर हो सकती है.
धारा 304 सजा का क्या है प्रावधान?
आईपीसी की धारा 304 के तहत, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु ऐसे कृत्य से होती है जिसमें आरोपी को यह जानकारी हो कि उसके कृत्य से मौत हो सकती है, लेकिन हत्या करने का स्पष्ट इरादा न हो. अगर उसके इस कृत्य से किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी पर इस धारा के तहत केस दर्ज किया जाता है जिसमें उसे अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
आर्म्स एक्ट की धारा 30 में सजा का प्रावधान
आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत भी आरोपी पर कार्रवाई हो सकती है. कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति हथियार लाइसेंस की शर्तों या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे इस धारा के मुताबिक छह महीने तक की जेल, ₹2,000 तक का जुर्माना, या दोनों सजाएं हो सकती हैं.



