मुंबई में राज्यसभा की खाली हुई सीट के लिए अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र जैन को उम्मीदवार घोषित किया है. यह सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. रविवार देर रात मुंबई में हुई अहम बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व ने जैन के नाम पर अंतिम मुहर लगाई. बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और उम्मीदवार चयन को लेकर लंबी चर्चा की गई. लंबे विचारविमर्श के बाद राजेंद्र जैन के नाम पर सहमति बनी.

सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता छगन भुजबल भी राज्यसभा जाने के इच्छुक थे. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने भतीजे समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की मांग रखी थी. इस संबंध में महायुति के स्तर पर भी चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव को अपेक्षा के मुताबिक समर्थन नहीं मिलने के कारण उनकी दावेदारी आगे नहीं बढ़ सकी. राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार की स्थिति बनने पर समीर भुजबल के नाम पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल राज्यसभा सीट के लिए राजेंद्र जैन को ही उम्मीदवार बनाया गया है.
विधानमंडल में महायुति के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण इस सीट पर मुकाबले की संभावना बहुत कम मानी जा रही है. ऐसी भी चर्चा है कि विपक्षी महाविकास आघाड़ी इस चुनाव में अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगी. राज्यसभा की इस सीट के लिए मतदान 18 जून को होना है. अगर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता है तो राजेंद्र जैन का निर्वाचन निर्विरोध हो सकता है.
किन और दो और नामों पर हुई चर्चा?
पार्टी के एक सीनियर नेता के मुताबिक, शनिवार को पार्टी की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई. बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने ये बात रखी गई. उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले के लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी की जरूरत होगी. सीनियर नेता ने कहा कि भुजबल की उम्मीदवारी पर कोई आम सहमति न बन पाने के कारण पार्टी ने दूसरे विकल्पों पर विचार किया और आखिरकार जैन को चुना, जो विधान परिषद में भंडारागोंदिया लोकल बॉडीज निर्वाचन क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. जिन अन्य नामों पर विचार किया गया, उनमें पूर्व सांसद नवनीत राणा और एनसीपी नेता प्रमोद हिंदुराव और अविनाश आदिक शामिल थे.
ततकारे ने कहा कि पार्टी ने राज्यसभा में विदर्भ का प्रतिनिधित्व मजबूत करने के लिए जैन को चुना है. भुजबल के बारे में उन्होंने कहा कि वो हमारे सबसे सीनियर नेता हैं और 1999 में पार्टी के गठन के समय इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष थे. उनके नाम पर भी चर्चा हुई थी और सर्वसम्मति से ये तय किया गया कि पार्टी उनके सीनियर होने का उचित सम्मान करेगी.



