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दुनिया की सबसे ऊंची रोड टनल का आज अंतिम ब्रेकथ्रू, ऑल वेदर टनल से सेना को होगा फायदा.

दुनिया की सबसे ऊंची रोड टनल का आज अंतिम ब्रेकथ्रू, ऑल वेदर टनल से सेना को होगा फायदा.

भारत की सबसे महत्वकांक्षी और चुनौतीपूर्ण जोजिला टनल परियोजना में आज अहम दिन है। आज यानी मंगलवार 9 जून को 13.15 किमी लंबी जोजिला टनल का अंतिम ब्रेकथ्रू होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस फाइनल ब्रेक थ्रू सेरेमनी में मौजूद रहेंगे।

बता दें कि यह दुनिया की सबसे लंबी, सिंगल-ट्यूब, हाई-अल्टीट्यूड वाली दो तरफा रोड टनल होगी। यह सड़क टनल कश्मीर घाटी को Ladakh से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी और बड़ी बात यह है कि यह हर मौसम में चालू रहेगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों में पाकिस्तान व चीन बॉर्डर के संवेदनशील बॉर्डर है, ऐसे में वहां पर सेना की रणनीतिक क्षमता को बढ़ाने में भी यह टनल अहम भूमिका निभाएगी।

ज्ञात हो कि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कश्मीर-लद्दाख नेशनल हाईवे लगभग 6 महीने तक बंद रहता है। ऐसे मौसम में सेना का गाड़ियों की आवाजाही भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है। रणनीतिक रूप से काफी अहम जोजिला टनल इस समस्या का स्थायी समाधान करेगी। इस टनल के बन जाने से सेना की अग्रिम चौकियों तक तेजी से रसद व सैन्य साजो-सामान पहुंचाने में मदद मिलेगी।

जोजिला टनल की समुद्र तल से ऊंचाई?

बता दें कि यह सुरंग समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में बनाई जा रही है। यह बालटाल (सोनमर्ग के पास, जम्मू-कश्मीर) को लद्दाख के द्रास-कारगिल क्षेत्र स्थित मिनीमर्ग से जोड़ेगी।

मिलेगी हर मौसम में कनेक्टिविटी

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रीनगर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। अब तक जोजिला पास भारी बर्फबारी, एवलांच और कठोर सर्दियों के कारण हर साल लगभग 6 महीने तक बंद रहता था, जिससे लद्दाख का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट जाता था। टनल बन जाने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और रणनीतिक आवाजाही में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह परियोजना क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार देगी।

सोनमर्ग और बालटाल की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

इस परियोजना का निर्माण कार्य मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) द्वारा किया जा रहा है, जिसने दुनिया की सबसे कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में यह इंजीनियरिंग चुनौती स्वीकार की। मुख्य टनल के साथ-साथ निलग्रार टनल सिस्टम भी इसका अहम हिस्सा है, जिसमें ट्विन-ट्यूब टनल शामिल हैं। यह कॉरिडोर सोनमर्ग और बालटाल के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है और मुख्य टनल तक पहुंच को आसान बनाता है।

आधुनिक एवलांच सुरक्षा उपाय अपनाए गए

परियोजना में आधुनिक एवलांच सुरक्षा उपाय भी शामिल किए गए हैं, जैसे कट-एंड-कवर संरचनाएं और मजबूत सुरक्षा दीवारें, जो पश्चिमी हिमालय के कठोर मौसम को झेलने में सक्षम हैं। टनल के शुरू होने के बाद यात्रा में रुकावटें काफी कम हो जाएंगी और क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं की पहुंच भी बेहतर होगी। साथ ही यह लद्दाख की रणनीतिक और आर्थिक महत्व को और मजबूत करेगा।

जोजिला टनल परियोजना भारत की हाई-ऑल्टीट्यूड वाली इंजीनियरिंग क्षमता का एक प्रतीक बनने जा रही है और इसे देश की मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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