
Kalsarp Yog 2026: कालसर्प योग तब बनता है जब सभी ग्रह राहु-केतु के बीच में आ जाते हैं। ये योग अमूमन अशुभ फल देने वाला माना जाता है। बता दें 9 जून 2026 को इस योग का निर्माण हुआ है और 23 जून तक ये योग सक्रिय रहने वाला है। इस बीच 3 राशि वालों को करियर में भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में इन राशियों के लोगों को कार्यक्षेत्र में बड़े संभलकर रहने की जरूरत होगी। किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। चलिए जान लेते हैं ये कौन सी राशियां हैं।
कैसे बनता है कालसर्प योग?
सिंह राशि
सिंह वालों को कालसर्प योग के कारण करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आपका अपने सहकर्मियों के साथ किसी बात को लेकर वाद-विवाद हो सकता है। इस अवधि में बॉस से भी संबंध खराब होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आपको अपने बोलने के तरीके पर संयम रखना होगा। काम में जरा सी भी लापरवाही आपका भारी नुकसान करा सकती है। कार्यस्थल पर गॉसिप से दूर रहें और 23 जून तक नौकरी बदलने की बिल्कुल भी न सोचें।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए कालसर्प योग आर्थिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस दौरान पैसों के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतनी होगी। कार्यस्थल पर कोई करीबी धोखा दे सकता है। आपको छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहना होगा और किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा न करें। करियर से जुड़े बड़े फैसले फिलहाल 23 जून तक न लें तो अच्छा रहेगा। निवेश बेहद सोच-समझकर करें नहीं तो भारी नुकसान हो सकता है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वाले जातकों को कालसर्प योग करियर में भारी नुकसान करा सकता है। आपको हर काम बेहद सावधानी से करना होगा। अपना काम किसी दूसरे के भरोसे न छोड़ें क्योंकि इससे आपको नुकसान हो सकता है। आपकी मेहनत का क्रेडिट कोई दूसरा ले सकता है। ऐसे में सतर्क रहें। ऑफिस में राजनीति का शिकार हो सकते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि दूसरों से दूरी बनाकर रखें और अपने काम से काम रखें। गुस्से पर कंट्रो रखें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।
कालसर्प योग के बुरे प्रभाव से बचने का सरल उपाय
कालसर्प योग के बुरे प्रभाव से बचना चाहते हैं तो प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप जरूर करें। साथ ही बहते हुए जल में चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े को प्रवाहित करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।



