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हेलीकॉप्टर टिकट के नाम पर लाखों की ठगी, दिल्ली पुलिस ने साइबर गिरोह का किया भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार..

हेलीकॉप्टर टिकट के नाम पर लाखों की ठगी, दिल्ली पुलिस ने साइबर गिरोह का किया भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार..

केदारनाथ, वैष्णो देवी और अन्य धार्मिक यात्राओं के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग कराने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का दक्षिण जिला साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक पेशेवर वेब डेवलपर भी शामिल है, जिसने फर्जी वेबसाइट तैयार कर इस ठगी को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में दर्ज करीब 30 साइबर शिकायतों से जुड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में अब तक लगभग 10 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी वेबसाइटों और ऑनलाइन पेमेंट लिंक के जरिए श्रद्धालुओं को निशाना बनाते थे और हेलीकॉप्टर टिकट की झूठी बुकिंग दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओमप्रकाश कुमार, रोहित कुमार और श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केदारनाथ, वैष्णो देवी और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग का झांसा देकर लोगों को ठग रहा था। पुलिस ने बताया कि ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार को बिहार के नालंदा से गिरफ्तार किया गया, जबकि गिरोह के कथित मास्टरमाइंड श्रेयांश तिवारी को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से पकड़ा गया।

डीसीपी अनंत मित्तल के अनुसार, एक श्रद्धालु ने शिकायत दर्ज कराई थी कि हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के दौरान उससे 20,328 रुपये की ठगी की गई। शिकायत के आधार पर साइबर थाना दक्षिण जिला में एफआईआर संख्या 30/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि पीड़ित ने “irctc-helicopter.com” और “irctc-heliyatra.com” नामक फर्जी वेबसाइटों के जरिए बुकिंग की थी। पुलिस के अनुसार, ये वेबसाइटें असली प्लेटफॉर्म की तरह दिखाकर श्रद्धालुओं को भ्रमित कर रहीं थीं और भुगतान के बाद कोई वैध टिकट जारी नहीं किया जाता था।

जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी वेबसाइटों को इस तरह डिजाइन करते थे कि वे पहली नजर में किसी अधिकृत हेलीकॉप्टर बुकिंग पोर्टल या IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखें। पुलिस के अनुसार, वेबसाइटों का नाम, रंग संयोजन, लेआउट, बुकिंग फॉर्म और भुगतान प्रक्रिया तक असली पोर्टल की तरह तैयार की गई थी, ताकि श्रद्धालु आसानी से धोखे में आ जाएं और भुगतान कर दें। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी श्रेयांश तिवारी इन वेबसाइटों के तकनीकी विकास और संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहा था। इसी तकनीकी सेटअप के जरिए यह गिरोह लोगों को झांसा देकर पैसे ऐंठता था।

तकनीकी जांच से खुला साइबर ठगी का राज

पुलिस उपायुक्त (ऑपरेशन) अरविंद कुमार की निगरानी और साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर हंसराज स्वामी के नेतृत्व में विशेष टीम ने इस पूरे मामले की जांच की। टीम में एसआई आशीष, हेड कांस्टेबल प्रवीण, विकास और विनोद, तथा कांस्टेबल प्रवीण जून और सुल्तान शामिल थे। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों के लेन-देन, डोमेन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, जीमेल अकाउंट, आईपी लॉग्स, होस्टिंग कंपनी और गूगल से प्राप्त तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया। इन्हीं डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान संभव हो सकी।

फेसबुक और मेटा विज्ञापनों से फैलाते थे जाल

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी अपनी नकली वेबसाइटों का प्रचार फेसबुक और मेटा (Meta Platforms) पर पेड विज्ञापनों के जरिए करते थे। जब कोई श्रद्धालु केदारनाथ या वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर खोजता था, तो उसे इन फर्जी वेबसाइटों के लिंक प्रमुखता से दिखाई देते थे। इन्हीं विज्ञापनों और सर्च रिजल्ट्स के जरिए लोग भ्रमित होकर इन साइटों पर पहुंच जाते थे और ऑनलाइन भुगतान कर ठगी का शिकार बन जाते थे। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क डिजिटल मार्केटिंग तकनीकों का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बना रहा था। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और साइबर टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि विज्ञापन नेटवर्क के जरिए और कितने लोग इस ठगी में फंसे हैं।

पुलिस के अनुसार, बुकिंग राशि जमा होने के बाद आरोपी फोन कॉल, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए श्रद्धालुओं से संपर्क में बने रहते थे। इसके बाद वे रजिस्ट्रेशन शुल्क, सत्यापन शुल्क, बीमा शुल्क, रिफंड प्रोसेस और नई बुकिंग जैसे अलग-अलग बहानों से अतिरिक्त रकम की मांग करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि भुगतान प्राप्त होने के बाद आरोपी श्रद्धालुओं को व्हाट्सऐप या ई-मेल के जरिए फर्जी ई-टिकट भेज देते थे, जिससे शुरुआत में उनका भरोसा बना रहे। हालांकि, कई पीड़ितों को ठगी का अहसास तब हुआ जब उन्हें वास्तविक बुकिंग की कोई पुष्टि नहीं मिली या संबंधित हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता के रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज नहीं पाया गया।

जांच के अनुसार, ठगी से प्राप्त रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कई म्यूल बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट चैनलों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि यह तरीका खासतौर पर इसलिए अपनाया जाता था ताकि लेन-देन की असली कड़ी छिपी रहे और जांच एजेंसियों को आरोपियों तक पहुंचने में समय लगे। जांच एजेंसियां अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन खातों का संचालन किन-किन लोगों के जरिए किया जा रहा था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस साइबर गिरोह से जुड़ी गतिविधियों का संबंध देशभर में दर्ज करीब 30 एनसीआरपी शिकायतों से पाया गया है। इन मामलों में अब तक लगभग 10 लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, हालांकि पुलिस को आशंका है कि वास्तविक ठगी की रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, महाराष्ट्र समेत कम से कम 12 राज्यों तक फैले हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

साइबर ठगी मामले में पुलिस जांच में एक और व्यक्ति की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने बताया कि नालंदा निवासी अनुराग नामक व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उससे जुड़े तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 10वीं पीढ़ी का एक आईपैड, कई एटीएम और डेबिट कार्ड सहित साइबर अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, शिकायतकर्ता से ठगे गए 20,328 रुपये भी संबंधित बैंक खाते में फ्रीज करा दिए गए हैं, ताकि उन्हें आगे की जांच के बाद वापस कराया जा सके।

बुकिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान

हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर हुए साइबर ठगी मामले के बाद पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी तरह की हेलीकॉप्टर टिकट या यात्रा संबंधी बुकिंग केवल अधिकृत और आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से ही की जाए। अधिकारियों के अनुसार, बुकिंग से पहले वेबसाइट का URL ध्यान से जांचना जरूरी है, क्योंकि कई फर्जी साइटें असली जैसी दिखने वाले नाम और डिजाइन का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करती हैं। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया या गूगल पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी विज्ञापन या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके।

साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें

साइबर ठगी के मामलों में पुलिस ने लोगों को तुरंत सतर्क होने और समय पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में शुरुआती 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या National Cyber Crime Portal पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस का कहना है कि त्वरित शिकायत दर्ज होने पर ठगी गई रकम को बैंक स्तर पर फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है, जिससे पीड़ित को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।

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