
कहा जाता है कि एक छोटी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत की वजह बन सकती है, और जब बात हमारी सेहत की हो, तो यह बात 100 फीसदी सच साबित होती है। अक्सर लोग क्रोनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई बीपी और थायराइड से पीड़ित होने के बाद भी अपनी रोजमर्रा की आदतों को नहीं बदलते। कई रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई बार दवाएं सही समय पर लेने के बावजूद मरीजों की स्थिति सिर्फ इसलिए खराब हो जाती है क्योंकि वे अनजाने में खान-पान में कुछ बुनियादी गलतियां करते हैं।
World Health Organization (WHO) की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में 70% से अधिक मौतें संक्रामक बीमारियों से नहीं, बल्कि इन 10 गलत लाइफस्टाइल की आदतों (Non-Communicable Diseases) के कारण हो रही हैं। डॉक्टर की दवाएं केवल 30% काम करती हैं, बाकी का 70% कंट्रोल आपकी रोजमर्रा की आदतों और खान-पान के सही समय पर निर्भर करता है। लाइफस्टाइल की ये छोटी-छोटी भूलें सामान्य से दिखने वाले मर्ज को भी गंभीर रूप दे सकती हैं। आइए जानते हैं कि अलग-अलग बीमारियों में किन आदतों से बचना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर में ज्यादा नमक खाना
हाई बीपी के मरीजों को अधिक नमक खाने से बचना चाहिए। ज्यादा सोडियम शरीर में पानी को रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। The Lancet और World Health Organization (WHO) की ‘ग्लोबल सोडियम रिडक्शन’ रिपोर्ट के अनुसार, जब शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है, तो किडनी खून से पानी को पूरी तरह फिल्टर नहीं कर पाती। यह एक्स्ट्रा पानी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में दबाव बढ़ाता है। स्टडी साबित करती है कि रोजाना तय मात्रा से अधिक नमक खाने से स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा 23% तक बढ़ जाता है।
डायबिटीज में देर रात खाना
डायबिटीज के मरीजों के लिए देर रात भोजन करना नुकसानदायक हो सकता है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल प्रभावित हो सकता है और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता पर भी असर पड़ सकता है। The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism की एक क्लिनिकल स्टडी में पाया गया कि देर रात भोजन करने से शरीर का नैचुरल ‘सार्केडियन रिदम’ (बायोलॉजिकल क्लॉक) बिगड़ जाता है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त होता है और इंसुलिन का स्राव कम होता है। रिसर्च के अनुसार, देर रात खाने वाले मरीजों में खाली पेट की शुगर (Fasting Blood Sugar) और इंसुलिन रेजिस्टेंस में 20% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
गैस्ट्राइटिस में जल्दी-जल्दी खाना
गैस्ट्राइटिस से पीड़ित लोगों को बहुत तेजी से खाना खाने की आदत छोड़नी चाहिए। जल्दी खाने से पाचन पर असर पड़ता है और पेट में जलन, गैस तथा एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। Journal of Epidemiology में प्रकाशित एक जापानी क्लिनिकल रिसर्च के मुताबिक जब हम बहुत तेजी से खाना चबाते हैं, तो भोजन के साथ अत्यधिक हवा (Air) भी पेट के अंदर चली जाती है। इसके अलावा, बड़े निवाले पचाने के लिए पेट को अत्यधिक हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) रिलीज करना पड़ता है। रिसर्च बताती है कि जल्दी-जल्दी खाने वाले लोगों में गैस्ट्रिक अल्सर और पेट में भयंकर ब्लोटिंग (सूजन) का खतरा 3 गुना अधिक होता है।
हड्डियों की समस्या में धूप से बचना
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए विटामिन-डी जरूरी है, जिसका प्रमुख स्रोत धूप है। लगातार धूप से बचने की आदत हड्डियों को कमजोर बना सकती है और बोन हेल्थ पर असर डाल सकती है। The American Journal of Clinical Nutrition की रिपोर्ट के मुताबिक हम चाहे कितना भी कैल्शियम खा लें, लेकिन अगर शरीर में विटामिन-डी नहीं है, तो आंतें उस कैल्शियम को सोख (Absorb) नहीं पाएंगी। रिसर्च के अनुसार, लगातार एसी (AC) कमरों में रहने और धूप से बचने के कारण शरीर में कैल्शियम हड्डियों के बजाय यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाता है, जिससे 40 के बाद ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के टूटने का जोखिम 40% बढ़ जाता है।
माइग्रेन में समय पर भोजन न करना
माइग्रेन के मरीजों में भोजन छोड़ना या समय पर खाना न खाना सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए नियमित समय पर भोजन करना जरूरी माना जाता है। The Journal of Headache and Pain में छपा न्यूरोलॉजिकल अध्ययन के मुताबिक भोजन छोड़ने या समय पर न खाने से खून में ग्लूकोज का स्तर अचानक गिर जाता है (Hypoglycemia)। दिमाग को ऊर्जा न मिलने के कारण स्ट्रेस हॉर्मोन्स रिलीज होते हैं और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में खिंचाव आता है। रिसर्च के अनुसार 67 % मामलों में समय पर भोजन न करना ही माइग्रेन का सबसे बड़ा ‘ट्रिगर’ पाया गया है।
एनीमिया में भोजन के साथ चाय पीना
एनीमिया के मरीजों को खाने के तुरंत साथ चाय पीने से बचना चाहिए। चाय में मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं, जिससे शरीर में आयरन की कमी बढ़ सकती है। European Journal of Clinical Nutrition की न्यूट्रिशनल स्टडी के मुताबिक चाय में ‘टैनिन’ (Tannins) और ‘पॉलीफेनोल्स’ नामक यौगिक होते हैं। क्लिनिकल रिसर्च साबित करती है कि भोजन के ठीक बाद या साथ में चाय पीने से ये तत्व भोजन में मौजूद आयरन से चिपक जाते हैं और आंतों में उसके अवशोषण को 60% से 70% तक ब्लॉक कर देते हैं, जिससे हीमोग्लोबिन कभी नहीं बढ़ पाता।
एसिड रिफ्लक्स में भोजन के बाद तुरंत लेटना
एसिड रिफ्लक्स या GERD से पीड़ित लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचना चाहिए। ऐसा करने से पेट का एसिड भोजन नली में वापस आ सकता है और सीने में जलन बढ़ सकती है। The American Journal of Gastroenterology का शोध के मुताबिक हमारे पेट और भोजन नली (Esophagus) के बीच एक वाल्व होता है जिसे LES कहा जाता है। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का असर खत्म हो जाता है और पेट का एसिड उस वाल्व को धकेलकर भोजन नली में आ जाता है। रिसर्च के अनुसार, भोजन और सोने के बीच कम से कम 3 घंटे का गैप न रखने से GERD और ग्रासनली के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
अस्थमा में धूल-धुएं वाले वातावरण में रहना
अस्थमा के मरीजों के लिए धूल, धुआं और प्रदूषण वाले वातावरण में रहना खतरनाक हो सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ सकता है। European Respiratory Journal में प्रकाशित श्वसन रोग अनुसंधान के मुताबिक धूल, धुएं और पीएम 2.5 कणों के संपर्क में आने से अस्थमा के मरीजों के वायुमार्ग (Bronchial Tubes) में अचानक तीव्र सूजन आ जाती है और कोशिकाएं अत्यधिक बलगम (Mucus) बनाने लगती हैं। रिसर्च के अनुसार, प्रदूषित वातावरण फेफड़ों की कार्यक्षमता को 15% तक तुरंत कम कर देता है, जो एक गंभीर अस्थमा अटैक की वजह बनता है।
हृदय रोग में लंबे समय तक बैठे रहना
दिल के मरीजों को लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने की आदत से बचना चाहिए। शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकती है और रक्त संचार को प्रभावित कर सकती है। American Heart Association (AHA) और Circulation Journal की प्रसिद्ध स्टडी के मुताबिक लगातार 2 घंटे से अधिक बैठे रहने से शरीर में ‘लाइपोप्रोटीन लाइपेस’ नामक एंजाइम निष्क्रिय हो जाता है, जो फैट को बर्न करता है। इसके कारण नसों में खराब कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है और रक्त संचार सुस्त हो जाता है। रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक सिटिंग जॉब करने वाले लोगों में सक्रिय लोगों की तुलना में दिल की बीमारियों का खतरा 52% अधिक होता है।
किडनी स्टोन में कम पानी पीना
किडनी स्टोन की समस्या में पर्याप्त पानी न पीना सबसे बड़ी गलतियों में से एक माना जाता है। कम पानी पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। Journal of the American Society of Nephrology (JASN) के क्लिनिकल ट्रायल के मुताबिक जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड का सांद्रण (Concentration) अत्यधिक बढ़ जाता है। पानी की कमी के कारण ये मिनरल्स बहने के बजाय आपस में चिपककर क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं। रिसर्च के अनुसार, जो लोग रोजाना 2.5 लीटर से कम पानी पीते हैं, उनमें किडनी स्टोन होने का जोखिम 80% तक ज्यादा होता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता, पाठकों की शिक्षा और वैश्विक चिकित्सा शोधों के निष्कर्षों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से आपके निजी डॉक्टर या विशेषज्ञ द्वारा किए जाने वाले इलाज, निदान या मेडिकल Prescription का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, मेडिकल हिस्ट्री और बीमारी की गंभीरता अलग होती है। अपनी दवाओं, डाइट प्लान, एक्सरसाइज या लाइफस्टाइल में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सीधी सलाह लें।



